कपूरथला शहर के लाहौरी गेट क्षेत्र में रविवार दोपहर बाद एक युवक की तेजधार हथियारों से हमला कर हत्या किए जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। गंभीर रूप से घायल युवक को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। वारदात की सूचना मिलते ही सिटी थाना पुलिस और अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा जांच शुरू कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान जतिंद्र सहगल उर्फ जिंदर निवासी लाहौरी गेट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि रविवार शाम करीब 4 बजे कुछ हमलावरों ने जतिंद्र सहगल को घेर लिया और उस पर तेजधार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। आसपास के लोगों ने घायल अवस्था में उसे सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे चुनावी रंजिश है। उनका कहना था कि पुरानी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।उन्होंने बताया कि मृतक अपनी छह बहनों का इकलौता भाई था, जिसके निधन से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अस्पताल में मृतक की बहनों और परिजनों का रो–रोकर बुरा हाल था।वहीं, मामले को लेकर डीएसपी सब–डिवीजन शीतल सिंह ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में मामला आपसी रंजिश का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में तीन हमलावरों की पहचान कर ली है, जबकि अन्य आरोपियों की पहचान भी की जा रही है।उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। डीएसपी ने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।लाहौरी गेट में हुई जतिंद्र सहगल उर्फ जिंदर की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की दुनिया उजड़ने की कहानी है, जिसका सहारा एक ही पल में छिन गया। अस्पताल के बाहर जब छह बहनों की चीखें गूंज रही थीं, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। परिजनों के अनुसार जतिंद्र सहगल के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी जिंदर के कंधों पर आ गई थी। वह छह बहनों का इकलौता भाई था और पूरे परिवार की उम्मीद उसी से जुड़ी हुई थी।बहनों के सुख–दुख, घर का खर्च और हर छोटी–बड़ी जिम्मेदारी वही निभा रहा था। जिंदर केवल अपनी बहनों का ही सहारा नहीं था, बल्कि वह दो मासूम बेटियों का पिता भी था। उसकी मेहनत से ही घर का चूल्हा जलता था और पूरे परिवार का खर्च चलता था। अब उसके अचानक चले जाने के बाद परिवार के सामने रोजी–रोटी से लेकर भविष्य तक की चिंता खड़ी हो गई है।सिविल अस्पताल में अपनी भाई की मौत की खबर सुनकर बहनों का रो–रोकर बुरा हाल था। हर बहन की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था “अब हमारा सहारा कौन बनेगा?” वहीं अपनी बेटियों के सिर से पिता का साया उठ जाने की पीड़ा ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुरानी चुनावी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें न्याय चाहिए, ताकि किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की रीढ़ टूटने की कहानी है, जिसने पहले पिता को खोया और अब घर का इकलौता बेटा, भाई और दो बेटियों का पिता भी उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गया।









