मोहाली, 21 जून
मिसल सतलुज संगठन के अध्यक्ष सरदार अजेपाल सिंह बराड़ ने उत्तराखंड के नगरासू स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब में बने तनावपूर्ण हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का कोई भी प्रयास सिख कौम कभी स्वीकार नहीं करेगी।सरदार बराड़ ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुद्वारा साहिब के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं तथा इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि इससे सिख संगतों के मन में बेचैनी और आशंकाएं भी पैदा हो रही हैं।उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि सिख इतिहास, परंपरा और सेवा-सिमरन की महान विरासत का प्रतीक है। इसलिए गुरु घर की मर्यादा, लंगर परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना प्रत्येक सिख का कर्तव्य है।सरदार बराड़ ने घोषणा की कि इस संवेदनशील अवसर पर मिसल सतलुज गुरु घर की सेवा और मर्यादा की रक्षा के लिए डटी हुई समस्त सिख संगतों तथा निहंग सिंहों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, दबाव अथवा सरकारी शक्ति के बल पर गुरु घर के प्रबंधों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया गया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि सिख कौम ने हमेशा अपने धार्मिक स्थलों, मर्यादाओं और कौमी स्वाभिमान की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानियां दी हैं। इसलिए किसी भी प्रशासन को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि धार्मिक अधिकारों को बलपूर्वक दबाया जा सकता है।मिसल सतलुज ने उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति को और अधिक बिगाड़ने वाले किसी भी कदम से तुरंत परहेज किया जाए तथा संगतों के साथ आपसी सम्मान और संवाद के माध्यम से इस संवेदनशील मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए।उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटती है अथवा सिख भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखंड प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।अंत में सरदार अजेपाल सिंह बराड़ ने समस्त सिख संगतों से अपील की कि वे स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखें, आपसी एकता कायम रखें तथा गुरु साहिब द्वारा बख्शी गई चढ़दी कला की भावना के अनुरूप शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता के साथ अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार रहें।









