नई दिल्ली 29 जून ,2026
शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह जी की 187वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बाराखंभा रोड स्थित महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका, महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों, कमेटी सदस्य तथा बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह का शासन न्याय, धार्मिक सौहार्द और सरबत के भले की भावना पर आधारित था। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने अपने लगभग 40 वर्षों के शासनकाल में किसी को भी मृत्युदंड न देकर मानवता, दया और न्याय का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी मिसाल आज भी पूरी दुनिया में दी जाती है।
उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने मात्र 19 वर्ष की आयु में लाहौर पर विजय प्राप्त की और 20 वर्ष की आयु में सिख साम्राज्य की स्थापना कर इतिहास में अपना अमिट स्थान बनाया। उनका साम्राज्य पंजाब से लेकर खैबर तक फैला हुआ था। अपनी दूरदर्शिता, वीरता और कुशल प्रशासन के बल पर उन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और आदर्श राज्य की स्थापना की।
सरदार कालका ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते थे। उन्होंने श्री हरिमंदिर साहिब को स्वर्णमंडित कराने के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों की भी उदारतापूर्वक सेवा की। यह उनकी धार्मिक सद्भावना, सहिष्णुता और मानवता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने विदेशी सैन्य विशेषज्ञों को अपनी सेना में शामिल कर उसे आधुनिक, अनुशासित और शक्तिशाली बनाया। यही कारण था कि पूरे भारत पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के बावजूद अंग्रेजों को पंजाब की ओर बढ़ने से पहले लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह का जीवन, उनका आदर्श शासन और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण आज भी प्रत्येक शासक और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों पर चलना और न्याय, समानता तथा मानवता के मूल्यों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।









