परशुराम जन्मोत्सव पर नमस्तक हुए विहिप बजरंग दल नेता:नरेश पंडित बोले-भगवान परशुराम का जीवन शक्ति-शांति का अद्भुत समन्वय
कपूरथला
भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर विरासती शहर में ब्राह्मण सभा द्वारा मंदिर धर्मसभा में आयोजित कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल के नेताओ ने शिरकत कर भगवान परशुराम का आशीर्वाद लिया और समूह देशवासियों और क्षेत्रवासियों को भगवान परशुराम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के अध्क्ष्य नरेश पंडित ने भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका जीवन शक्ति और शांति का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है,जो आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।नरेश पंडित ने भगवान परशुराम के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं,जिन्होंने पृथ्वी से अन्यायी और अहंकारी शासकों का विनाश कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी।उनका जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था।वे महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे तथा भार्गव नाम से भी प्रसिद्ध हैं।नरेश पंडित ने इस बात पर जोर दिया कि जब सत्ता मद में चूर होकर अपनी मर्यादा भूल जाती है और समाज में अन्याय व अत्याचार बढ़ने लगता है, तब शास्त्र के ज्ञाता को भी शस्त्र उठाकर न्याय की स्थापना करनी पड़ती है।भगवान परशुराम इसी सत्य के प्रतीक हैं, जिन्होंने अधर्म का नाश कर समाज में धर्म की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि परशुराम जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है,बल्कि न्याय,सत्य और साहस का संकल्प लेने का दिन है। नरेश पंडित के अनुसार आज के समय में भी समाज में व्याप्त बुराइयों,भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।नरेश पंडित ने भगवान परशुराम को चिरंजीवी बताते हुए कहा कि यह उनकी अमर चेतना का प्रतीक है।इससे यह संदेश मिलता है कि सत्य और न्याय कभी समाप्त नहीं होते, वे सदैव जीवित रहते हैं और समय-समय पर समाज को दिशा देते हैं।उन्होंने अग्रतः चतुरो वेदाःपृष्ठतःसशरं धनुःश्लोक का उल्लेख करते हुए समझाया कि केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि उस ज्ञान की रक्षा के लिए साहस और शक्ति भी आवश्यक है।व्यक्ति को वैचारिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का सामर्थ्य भी रखना चाहिए।नरेश पंडित ने कहा कि आज ब्राह्मण समाज को अपनी शक्ति पहचानने की आवश्यकता है।ब्राह्मणों के दमन के लिए कई कुचक्र चलाए गए,लेकिन समाज मिटा नहीं।बौद्धिक शक्ति पहले भी प्रेरणास्रोत थी,आज भी दिशा देने वाली है।इसके अलावा एकजुटता जरूरी है।उन्होंने कहा कि वक्त को पहचानने की जरूरत है,हताश होने की नहीं।उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और भारत सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न दिए जाने पर कृतज्ञता जताई।इस अवसर पर आरएसएस के उतर क्षेत्र सामाजिक समरसता प्रमुख प्रमोद कुमार,ब्राह्मण सभा के डा.रणवीर कौशल,ज्योति प्रकाश शर्मा,धर्मसभा के उपाध्क्षय विजय खोसला,विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़, जिला सह मंत्री अशोक कुमार,आरएसएस के बलविंदर सिंह,बजरंग दल के प्रदेश नेता संजय शर्मा,जिलाध्क्षय आनंद यादव,जिला उपाध्क्षय मुकुल अरोड़ा,डॉ हरदीप सिंह ठाकुर, राकेश शर्मा,मनोज शर्मा आदि उपस्थित थे।











