-भगवान श्री परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में कपूरथला में धार्मिक समारोह
-धूमधाम से मनाई गई परशुराम जयंती, भक्तों ने किया पूजन
कपूरथला| श्री ब्राह्मण सभा कपूरथला की ओर से भगवान श्री परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में भव्य धार्मिक समारोह श्री सनातन धर्म सभा कपूरथला में करवाया। ब्राह्मणों के आराध्य भगवान परशुराम की जयंती श्री सनातन धर्म सभा कपूरथला में बड़े धूमधाम से मनाई गई। चित्र पर फूल माला के साथ धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर हवन–पूजन किया। इसमें प्रमोद कुमार (सामाजिक समरसता प्रमुख, उत्तर क्षेत्र) रूप में पहुंचे। धार्मिक परंपराओं हर्षोल्लास से मनाए गए समारोह का आगाज हवन यज्ञ से किया गया। इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत नीलम एवं उनकी पार्टी द्वारा संकीर्तन से की, जिसके पश्चात अभिनाश शर्मा द्वारा भक्ति रस में सराबोर संकीर्तन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में प्रमोद कुमार (सामाजिक समरसता प्रमुख, उत्तर क्षेत्र) विशेष रूप से उपस्थित हूए और समाज को एकता एवं भाईचारे का संदेश िदया । मुख्यातिथि प्रमोद कुमार ने कहा की वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री नारायण ने अपने छठे अवतार में पृथ्वी लोक में ऋषि जगदंमिनी के घर में परशुराम के रूप में अवतार लिया था। इस दौरान उन्होंने अन्याय अत्याचार के खिलाफ अस्त्र–शस्त्र उठाकर 21 बार धरती से क्षत्रियों का संहार किया था। प्रमोद कुमार ने कहा की भगवान परशुराम के जीवन से अन्याय अत्याचार के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा मिलती है। प्रमोद कुमार ने कहा की परशुराम जयंती भगवान परशुराम की जयंती का पर्व है, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और वीरता, न्याय और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। यह पवित्र दिन हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो अक्षय तृतीया के साथ पड़ता है। अक्षय तृतीया को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रमोद कुमार ने कहा की परशुराम जयंती केवल एक देवता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह कालातीत सिद्धांतों—अन्याय के विरुद्ध साहस, धर्म के प्रति भक्ति, और असीम शक्ति के बावजूद विनम्रता—का प्रतीक है। प्रमोद कुमार ने कहा की भगवान परशुराम, जिन्हें भृगुपति के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्मशास्त्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे भगवान विष्णु के एकमात्र अवतार हैं जो अमर हैं और विभिन्न युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग) में जीवित रहते हैं। प्रमोद कुमार ने कहा की परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। उनके पिता एक महान ऋषि थे, और उनकी माता भक्ति और समर्पण की मूर्ति मानी जाती हैं।भगवान परशुराम को अक्सर उनके फरसे के साथ चित्रित किया जाता है। यह फरसा उन्हें भगवान शिव से कठोर तपस्या के बाद प्राप्त हुआ। यह उनका अस्त्र होने के साथ–साथ अधर्म को समाप्त करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रमोद कुमार ने कहा की ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बावजूद, परशुराम में क्षत्रिय योद्धा के गुण भी प्रबल थे। वे बुद्धि और पराक्रम का अद्वितीय संगम हैं। उन्होंने दुष्ट शासकों के अत्याचारों के खिलाफ युद्ध किया और धर्म की रक्षा की।परशुराम को सात अमर व्यक्तित्वों (चिरंजीवी) में से एक माना जाता है। यह कहा जाता है कि वे कलियुग के अंत में भगवान कल्कि के गुरु के रूप में पुनः प्रकट होंगे।भगवान परशुराम ने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर कमजोरों की रक्षा की। उनका जीवन हमें सिखाता है कि हमेशा सत्य और धर्म की राह पर चलना चाहिए। प्रमोद कुमार ने कहा की भगवान शिव के शिष्य होने के नाते, परशुराम को शस्त्र और युद्धकला में निपुण माना जाता है। वे महाभारत के भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं के गुरु रहे हैं।भगवान परशुराम का चरित्र हमें शारीरिक शक्ति और मानसिक बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन सिखाता है। वे हमें यह याद दिलाते हैं कि शक्ति का उपयोग हमेशा जिम्मेदारी और समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए। प्रमोद कुमार ने कहा की परशुराम जयंती अक्षय तृतीया के दिन पड़ती है, जो अनंत समृद्धि का प्रतीक है। भक्त मानते हैं कि इस दिन भगवान परशुराम की पूजा करने से साहस, ज्ञान और समृद्धि की अनंत कृपा प्राप्त होती है। श्री ब्राह्मण सभा (रजि.) कपूरथला के अध्यक्ष डा. रणवीर कौशल ने भगवान श्री परशुराम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उपस्थिति सदस्यों का ज्ञान बढ़ाया। सभा अध्यक्ष डा. रणवीर कौशल ने सभी सदस्यों का स्वागत किया। सभा की परंपरा के अनुसार ब्राह्मण सदस्यों उनके बच्चों की ओर से बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में सफलता अर्जित करने के लिए श्री ब्राह्मण सभा की ओर उन्हें सम्मानित किया गया। जयंती अवसर पर आयोजित भंडारे में पहुंचे लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। जयंती अवसर पर अध्यक्ष डा. रणवीर कौशल, मुख्य सलाहकार मदन लाल शर्मा, महासचिव जगदीश शर्मा व चीफ ट्रस्टी एडवोकेट एम.आर. कालिया, कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह, भाजपा जिला प्रधान रणजीत सिंह खोजेवाल, सत्य नारायण मंदिर के सेवादार नरेश गोसाईं, भाजपा नेता यज्ञदत्त ऐरी, सुभाष मकरंदी,रिम्पी शर्मा ,राकेश शर्मा , अश्वनी शर्मा ,संदीप पंडित ,सुरिंदर शर्मा , ज्योति प्रकाश शर्मा, नारायण वशिष्ठ, गुलशन शर्मा , डा. रजत कौशल ,
पंकज शर्मा ,नितिन शर्मा ,प्रदीप शर्मा ,संजीव भारद्वाज, मनोज शर्मा ,शिव दत्त कालिया ,कुलदीप शर्मा ,राकेश पराशर,दीपक सलवान,अनिल शुक्ला, बलबीर शर्मा, महिंदर शर्मा , अश्विनी शर्मा, वोवी शर्मा , रजनीश् कुमार , मनमोहन जोश्ी , पुरषोतम पासी, एडवोकेट अनुज आनंद, करण महाजन, राजेश् पासी , अमीत कालीया व अन्य हाजार थे











