केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई महत्वपूर्ण फैसले लिये गये, जिनकी जानकारी केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। इन निर्णयों का उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, कर्मचारियों को राहत देना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच व्यापार को सुरक्षित बनाना है।
सबसे प्रमुख निर्णय रेलवे क्षेत्र से जुड़ा है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 24815 करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन तथा राजमहेंद्रवरम से विशाखापत्तनम तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 601 किलोमीटर है और इनके तहत ट्रैक की कुल लंबाई 1317 किलोमीटर होगी।
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, भीड़भाड़ कम करना और माल तथा यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाना है। इससे संचालन क्षमता में सुधार होगा और सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। यह पहल प्रधानमंत्री के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिससे क्षेत्रीय विकास के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
गाजियाबाद से सीतापुर परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिल्ली से पूर्वी क्षेत्र को जोड़ने वाले उच्च घनत्व नेटवर्क का हिस्सा है। वर्तमान में इस मार्ग की क्षमता उपयोग 168 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो भविष्य में 207 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली और सीतापुर को लाभ मिलेगा। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी।
दूसरी ओर, राजमहेंद्रवरम से विशाखापत्तनम परियोजना पूर्वी तट के महत्वपूर्ण रेल गलियारे का हिस्सा है। यह मार्ग बंदरगाहों से जुड़ा हुआ है और माल ढुलाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां भी क्षमता का उपयोग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी पर पुल, वायाडक्ट और बाईपास जैसी संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिससे संचालन और अधिक कुशल होगा













