केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जालंधर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण को लेकर तीखा हमला बोला। उनके साथ उत्तर प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्या भी मौजूद रहीं। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में देश की आधी आबादी के साथ लंबे समय से अन्याय होता रहा है और कांग्रेस सरकार ने कभी गंभीरता से महिला आरक्षण को लागू करने की कोशिश नहीं की। खट्टर ने कहा कि जब–जब भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण देने की पहल की, तब–तब कांग्रेस और अन्य दलों ने बाधाएं खड़ी कीं। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक से इस दिशा में प्रयास होते रहे, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। 1979 में पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हुई और कई राज्यों में इसे 50 फीसदी तक बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि 2023 में 128वें संविधान संशोधन के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया, लेकिन विपक्ष के रवैये के कारण इसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। अब सरकार 2029 से पहले इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। खट्टर ने कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक एंगल देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए, लेकिन विपक्ष इसे भी राजनीति का मुद्दा बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर विधेयक की प्रतियां तक जलाई गईं, जो लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। खट्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस को इस विरोध का राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा और आने वाले चुनावों में महिलाओं का आक्रोश देखने को मिलेगा।वहीं, उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि जब संसद में महिला आरक्षण बिल पेश हुआ तो विरोधी दलों ने मिलकर इसे रोकने की कोशिश की, जो देश की आधी आबादी का अपमान है। उन्होंने कहा कि महिलाएं सब कुछ सह सकती हैं, लेकिन अपना अपमान नहीं। आने वाले चुनावों में इसका जवाब जरूर मिलेगा। मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और अन्य योजनाओं के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाया है। महिला वंदन विधेयक उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवाद की राजनीति करने वाली पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, डीएमके और अन्य महिलाओं को आरक्षण के साथ उनका बनता सम्मान भी नहीं देना चाहती।











