मोहाली 26 जून,2026
मिसल सतलुज जत्थेबंदी के अध्यक्ष सरदार अजेपाल सिंह बराड़ ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब, अबचल नगर, नांदेड़ से संबंधित लगभग 70 वर्ष पुराने कानून में संशोधन कर नया कानून लाने को मंजूरी दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सरदार बराड़ ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत 17 सदस्यीय बोर्ड में से 12 सदस्यों को महाराष्ट्र सरकार नामित करेगी, जबकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधित्व को चार से घटाकर केवल दो सदस्यों तक सीमित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त चीफ खालसा दीवान और हजूरी सचखंड दीवान की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करने के साथ-साथ सिख सांसदों के लिए आरक्षित सीटों को भी खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों को किसी भी दृष्टि से पारदर्शिता अथवा सुधार के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। वास्तव में यह सिख पंथ के पाँच तख्तों में से एक महान तख्त के प्रबंधन को सिख संगत से दूर करके उसे सरकारी तंत्र के अधीन लाने का एक सुनियोजित प्रयास है। सरदार बराड़ ने कहा कि सिख संस्थाओं और गुरुद्वारों का प्रबंधन सिख धर्म की धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप ही संचालित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को सिखों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि वे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करें। मिसल सतलुज जत्थेबंदी के अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सिख धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता को समाप्त करने के प्रयास जारी रहे तो सिख कौम इसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से डटकर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सिख इतिहास, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसके प्रबंधन पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने का कोई भी प्रयास कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।









