नई दिल्ली, 24 जून
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार हरमीत सिंह कालका ने आज यहां जारी एक बयान में बताया कि सिख कौम के महान योद्धा, निडर जर्नैल और खालसाई राज के मूल निर्माता बाबा बंदा सिंह बहादर जी की लासानी शहादत की याद को समर्पित विशाल गुरमत समागम 25 जून को शहीदी स्थल गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह जी बहादर, महरौली (नई दिल्ली) में श्रद्धा और सत्कार के साथ आयोजित किया जाएगा।
सरदार कालका ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादर ने गुरु साहिबान द्वारा दर्शाए गए सच, न्याय और मानव अधिकारों के सिद्धांतों को अपने जीवन में अमल करके जुल्म और तानाशाही के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष लड़ा। उनकी शहादत सिख इतिहास का वह सुनहरा अध्याय है जो हर पीढ़ी को धर्म, हिम्मत और कुर्बानी का संदेश देता रहेगा।
उन्होंने बताया कि समागम की शुरुआत सुबह 4:00 बजे पाठ श्री सुखमनी साहिब और नितनेम से होगी। इसके उपरांत सुबह 6:00 से 8:15 बजे तक भाई जगदीप सिंह, हजूरी रागी जत्था गुरुद्वारा सीस गंज साहिब द्वारा आसा की वार का कीर्तन किया जाएगा।
सुबह 9:15 से 10:15 बजे तक भाई सुखविंदर सिंह, हैड ग्रंथी गुरुद्वारा बाला साहिब द्वारा गुरमत कथा के माध्यम से संगतों को गुरु इतिहास और सिखी सिद्धांतों से जोड़ा जाएगा। इसके बाद 10:15 से 11:15 बजे तक भाई मनोहर सिंह, भाई गुरिंदर सिंह और भाई वजीर सिंह, हजूरी कीर्तनिए गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से संगतों को निहाल करेंगे।
11:15 बजे से 12:30 बजे तक प्रसिद्ध कीर्तनिए भाई कुलविंदर सिंह खरड़ वाले गुरबाणी कीर्तन की हाज़िरी भरेंगे। इसके उपरांत 12:00 से 12:45 बजे तक पंथक विचारों का विशेष सत्र होगा, जिसमें बाबा बंदा सिंह बहादर जी के जीवन, संघर्ष और पंथ प्रति योगदान पर चर्चा की जाएगी।
दोपहर 12:45 से 2:00 बजे तक श्री हरिमंदर साहिब के हजूरी रागी भाई सिमरप्रीत सिंह जी गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से संगतों को गुरु चरणों से जोड़ेंगे।
समागम के अंतिम चरण में दोपहर 2:00 से 3:00 बजे तक विशेष कवि दरबार सजाया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि सरदार मख्खन सिंह ढालीवाल, सरदार जसप्रीत सिंह जस्स, सरदार बलबीर सिंह कमल, सरदार गुरबचन सिंह चरण और बीबी सुरिंदर कौर कृष्णा पार्क अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से बाबा बंदा सिंह बहादर की महान शख्सियत को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सरदार हरमीत सिंह कालका ने समूची गुरु नानक नाम लेवा संगतों से अपील की कि वे इस महान गुरमत समागम में परिवारों सहित शमूलियत करके बाबा बंदा सिंह बहादर जी की शहादत को नमन करें और उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करें। समागम की समाप्ति अरदास के साथ होगी, जिसके उपरांत गुरु का अटूट लंगर वरताया जाएगा।








