धर्म प्रचार कमेटी और सिख संस्थाओं के प्रयासों की सराहना
नई दिल्ली, 20 जून: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की धर्म प्रचार कमेटी तथा दिल्ली की विभिन्न सिख संस्थाओं के सहयोग से बच्चों को गुरमुखी, गुरबाणी और गुरमत सिद्धांतों की शिक्षा देने के लिए 1 जून से 19 जून तक आयोजित किए गए गुरमत कैंपों के समापन समारोह “फाइनल गुरमत कैंप 2026” का आयोजन आज भाई लखी शाह वंजारा हॉल में श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने गुरमत कैंपों की सफलता के लिए धर्म प्रचार कमेटी, विभिन्न संस्थाओं, प्रचारकों, सेवादारों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने विशेष रूप से भाई सुखविंदर सिंह जी, भाई मनप्रीत सिंह जी तथा धर्म प्रचार कमेटी की पूरी प्रबंधन टीम की सराहना करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से इन गुरमत कैंपों की शुरुआत की गई थी, वह आज एक व्यापक जन-अभियान का रूप धारण कर चुका है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष गुरमत कैंपों में बच्चों की बढ़ती संख्या इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि युवा पीढ़ी में गुरमत शिक्षा के प्रति रुचि और सिखी से जुड़ने की भावना लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की यह जिम्मेदारी है कि गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों के अलावा अन्य विद्यालयों में पढ़ने वाले सिख बच्चों तक भी गुरमत शिक्षा पहुंचाई जाए।
सरदार कालका ने बताया कि इस वर्ष दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए 148 गुरमत कैंपों में लगभग 20 हजार बच्चों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इन कैंपों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गुरबाणी, गुरु साहिबानों के इतिहास और सिखी के अमर सिद्धांतों से जोड़ना है। बचपन में कंठ की गई गुरबाणी जीवन भर मनुष्य का मार्गदर्शन करती है और उसे सच्चे जीवन की राह दिखाती है।
उन्होंने कहा कि आज जब बच्चे गुरबाणी कंठ करके तथा गुरमत परीक्षाओं में भाग लेने के लिए उत्साहपूर्वक पहुंच रहे हैं, तो यह सिख कौम के लिए अत्यंत गर्व और प्रसन्नता की बात है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में हमारे बच्चे सांसारिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी मजबूती से जुड़े रहें, यह समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सरदार कालका ने बताया कि इस बार गुरमत कैंपों में बच्चों को सिख इतिहास से संबंधित विशेष पुस्तकें भी प्रदान की गईं, जिनके माध्यम से उन्हें सिख सेनानायकों, गुरु साहिबानों द्वारा लड़े गए युद्धों और महान शहादतों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास की कुर्बानियों और बलिदानों से परिचित होने वाला बच्चा अपनी पहचान और विरासत को कभी नहीं भूल सकता।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित निराले खालसा पंथ की कुर्बानियां और शहादतें जब बच्चों के मन में बस जाती हैं, तो वे जीवनभर गुरसिखी के मार्ग पर दृढ़ रहते हैं और कौम की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
सरदार कालका ने आशा व्यक्त की कि आज गुरमत कैंपों में भाग लेने वाले ये बच्चे भविष्य में सेवादारों, प्रचारकों और प्रबंधकों के रूप में गुरु घर की सेवा संभालेंगे तथा सिखी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने सभी सेवादारों, प्रबंधकों, अध्यापकों, अभिभावकों और विशेष रूप से उन बच्चों को बधाई दी, जिन्होंने 20 दिनों तक मेहनत करके गुरमत शिक्षा प्राप्त की और इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
उन्होंने इस सफल प्रयास के लिए धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन सरदार जसप्रीत सिंह करमसर और उनकी टीम की भरपूर प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में गुरमत प्रचार के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने भी संगत को संबोधित करते हुए बच्चों को सिखी से जोड़ने में अभिभावकों और प्रबंधकों के योगदान की प्रशंसा की तथा गुरमत कैंपों की निरंतर सफलता के लिए बधाई दी।









