Tribune Times

Tribune Times

दवाओं पर निर्भरता छोड़ें,योग और संतुलित जीवनशैली अपनाएं-हेंनत कुमार

SHARE:

 

बोले-स्थानीय स्तर पर हर वार्ड और मोहल्ले में छोटी-छोटी योग कमेटियों का गठन होना चाहिए

 

 

कपूरथला , 19 जून:

ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज :

 

आज की भाग-दौड़ भरी और तनावपूर्ण जीवनशैली में इंसान भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते-भागते अपने सबसे बड़े धन यानी स्वास्थ्य को पीछे छोड़ता जा रहा है।आधुनिक सुख-साधनों ने जहां हमारे काम आसान किए हैं,वहीं शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव को भी जन्म दिया है।इसी गंभीर विषय को लेकर आम आदमी पार्टी के हल्का संगठन इंचार्ज हेंनत कुमार ने इस बात पर बल दिया कि यदि कपूरथला के नागरिकों को एक स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीना है,तो उन्हें दवाओं पर अपनी निर्भरता कम करके प्राचीन भारतीय योग,व्यायाम और संतुलित खान-पान को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा।हेंनत कुमार के विचारों से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे बाजार से या मैडीकल स्टोर से खरीदा जा सके,यह हमारी रोजमर्रा की आदतों का परिणाम है।यदि हम आने वाली पीढ़ी को दवाओं से मुक्त एक सुंदर भविष्य देना चाहते हैं,तो हमें आज ही से योग, व्यायाम,संतुलित आहार और सकारात्मक सोच को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा।नियमित योग और प्राणायाम ही हमारे जीवन को दीर्घायु और निरोगी बना सकते हैं।कपूरथला वासियों के लिए यही आज के समय की सबसे बड़ी हुंकार और संकल्प है।उन्होंने कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी मानसिक या शारीरिक व्याधि से जूझ रहा है।इसका मुख्य कारण अनुशासनहीन जीवनशैली और छोटी छोटी दिक्कतों के लिए दवाओं पर निर्भर हो जाना है।हेंनत कुमार ने जोर देकर कहा पैसा और शोहरत इंसान दोबारा कमा सकता है,लेकिन एक बार स्वास्थ्य बिगड़ जाए तो उसे वापस पाना अत्यंत कठिन होता है।कपूरथला के युवाओं को खेलकूद और नियमित व्यायाम की तरफ लौटना होगा ताकि वे दवाओं और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर हर वार्ड और मोहल्ले में छोटी-छोटी योग कमेटियों का गठन होना चाहिए,जो सुबह के समय लोगों को जागरूक करें।उन्होंने एक अलग दृष्टिकोण देते हुए कहा कि अक्सर लोग स्वास्थ्य का मतलब केवल शारीरिक रूप से तंदुरुस्त होना मान लेते हैं,जबकि वास्तविक स्वास्थ्य में मानसिक और आत्मिक शांति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि  आज के दौर में ईर्ष्या,तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) ने लोगों को अंदर से खोखला कर दिया है और लोग मानसिक शांति के लिए एंटी-डिप्रेशन दवाओं का सहारा ले रहे हैं।योग और प्राणायाम केवल शरीर की कसरत नहीं हैं,बल्कि यह मन को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम हैं।जब तक हमारा मन स्थिर नहीं होगा,तब तक हम शारीरिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह सकते।हेंनत कुमार ने आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी कमजोरी यानी डिजिटल गैजेट्स पर अपनी चिंता व्यक्त की।उन्होंने कहा कि तकनीक ने हमें पूरी दुनिया से तो जोड़ दिया,लेकिन हमारे अपनों से और खुद हमारे शरीर से दूर कर दिया है। उन्होंने कहा आज का युवा सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मोबाइल देखता है।घंटों स्क्रीन के सामने बिताने से न केवल आंखें कमजोर हो रही हैं,बल्कि रीढ़ की हड्डी की बीमारियां और मोटापा भी तेजी से बढ़ रहा है।हमें डिजिटल डिटॉक्स की सख्त जरूरत है।दिन में कम से कम एक घंटा ऐसा होना चाहिए जब मोबाइल पूरी तरह बंद हो और हम पार्क में पसीना बहा रहे हों।

 

 

 

 

 

 

trfgcvkj.blkjhgfd
0
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें