कपूरथला – ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज :
विरासती शहर स्थित शालीमार बाग कपूरथला की हालत दयनीय बनी हुई है। बाग में जगह–जगह लगे कूड़े के ढेरों से निकल रही बदबू के चलते सैर करने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बाग में लगे फव्वारे टूटे हुए हैं। सफाई नहीं करवाने से पार्क में जगह–जगह गंदगी फैली हुई है। नगर निगम कपूरथला का दफ्तर का शालीमार बाग में स्थित है लेकिन निगम के अधिकारी बाग की साफ–सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं। पार्क में बेसहारा पशु घूमते रहते हैं। कूड़े के ढेरों से निकलने वाली बदबू, मच्छर व मक्खियों से बीमारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है। शालीमार बाग में बनाए गए चिल्ड्रेन पार्क में लगे झूले टूटे हुए हैं। सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। पार्क में लगे म्यूजिकल फव्वारे शो–पीस बन कर रह गया है। यहीं हाल शाखा स्थल का भी है जहां पर बेसहारा पशु बैठे रहते हैं। शालीमार बाग में सेवा केंद्र होने की वजह से लोगों का आना–जाना लगा रहता है। यहां बच्चों के कालेज का मुख्य गेट भी है लेकिन नगर–निगम सफाई व्यवस्था की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। शहर निवासी राकेश सभ्रवाल, विपन कुमार, मनजीत कुमार, राजेश कुमार, विनोद कुमार, परमजीत सिंह, दलजीत सिंह, मोहन सिंह, बलकार सिंह आदि ने नगर निगम से मांग की है कि शालीमार बाग की सुंदरता को बरकरार रखने के लिए नियमित तौर पर साफ–सफाई करवाई जाए। बंद पड़े फव्वारे चलाए जाएं। बाग में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को गोशाला में शिफ्ट किया जाए ताकि सैर करने के लिए आने वालों को राहत मिल सके। एक ओर पूरे देश भर में स्वच्छता मिशन चलाया जा रहा है लेकिन विरासती शहर के ऐतिहासिक शालीमार बाग के शौचालय की दुर्दशा इस अभियान की पोल खोल रही हैं।प्रशासन व नगर निगम द्वारा शहर में स्वच्छता बनाए रखने के दावे तो किए जाते हैं लेकिन अगर शहर के शौचालयों पर नजर डाली जाए तो उनमें गंदगी का आलम रहता है,जिससे लोगों को सांस रोककर या फिर नाक बंद कर शौचालय में जाना पड़ता है।यही नहीं शौचालयों की सीटों में न तो डाऊन पाइप हैं और न ही वहां नियमित रूप से सफाई की जाती है।हालांकि इस ओर कई मर्तबा नगर निगम के ध्यान में भी लाया गया लेकिन शौचालयों की दुर्दशा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते बदहाल स्थिति में है। लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए फव्वारे बंद पडे़ हैं। शालीमार बाग जो अक्सर रंग–बिरंगे फूलों और हरियाली से भरा रहता था, वह अब वीरान हुआ पड़ा है। बच्चों के लिए लगाए झूले व अन्य सामान भी टूट चुका है।टैक्टर–ट्रॉली, कार, जीप व बड़े वाहनों के आवागमन से शालीमार बाग एक आम रास्ता बन कर रह गया है। इससे बाग में घूमने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। नगर निगम ने ब्रह्मकुंड की तरफ बंद गेट को खोल रखा है, जिससे अधिकतर वाहन चालकों ने इस बाग को आम रास्ता बना लिया है। जिले के पूर्व डिप्टी कमिश्नरों ने बागों के इस शहर की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाया था, लेकिन कई कारणों से बागों के सुंदरीकरण का काम परवान नहीं चढ़ सका। अब हालत यह हैं कि शालीमार बाग की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी सुविधाएं जैसे लाइटें, बैठने की व्यवस्था और साफ–सफाई नाममात्र है। महाराजा कपूरथला के शासनकाल के दौरान इस बाग की सुदरंता के चर्चे दूर–दूर तक हुआ करते थे, लेकिन अब ये तमाम बातें सपना बन कर रह गई हैं। बाग में अकसर लावारिस पशु घूमते रहते हैं और पूरा दिन यहां गंदगी तो फैलाते ही हैं साथ ही यहां पेड़–पौधों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। शाम के समय बाग के मुख्य द्वार पर रेहड़ियों की भरमार रहती है, जिससे यहां से लोगों का गुजरना मुश्किल हो जाता है। विरासती शहर का ऐतिहासिक शालीमार बाग जिला प्रशासन व नगर निगम की उदासीनता के चलते बदहाल स्थिति में है।लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए फव्वारे बंद पडे़ हैं।शालीमार बाग जो अक्सर रंग–बिरंगे फूलों और हरियाली से भरा रहता था,वह अब वीरान हुआ पड़ा है।बच्चों के लिए लगाए झूले व अन्य सामान भी टूट चुका है।उपरोक्त नेताओ कहा कि अखबारों की सुर्खिया बटोरने के लिए शहर में जोरशोर से करवाए जा रहे विकास कार्यो का ढिंढोरा पीटने वाले कांग्रसी जनता को जरा यह बताने की कोशिश करेंगे की शहर में कहा पर और किस का हो रहा है। सफाई नहीं होने की वजह से शालीमार बाग की सुंदरता पर ग्रहण लग गया है।गंदगी की वजह से बाग में सुबह और शाम के समय सैर करने के लिए आने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। महाराजा कपूरथला के शासनकाल के दौरान इस बाग की सुदरंता के चर्चे दूर–दूर तक हुआ करते थे,लेकिन नगर निगम ने बाग पर ध्यान देना ही छोड़ दिया है,जबकि शालीमार बाग परिसर में ही नगर निगम का कार्यालय भी स्थित है और यहां पर रोजाना निगम के अधिकार भी आते हैं।फिर भी इसकी दशा पर किसी को तरश नहीं आती है।इससे यहां पर रोजाना सैर करने आने वाले लोगों को बहुत कष्ट है।शालीमार बाग शहर की शान है,शहर को चार चांद लगाता है,लेकिन नगर निगम प्रशासन ने इसकी सुंदरता बनाए रखने के प्रति कभी भी ध्यान नहीं दिया।इस तरह का बाग किसी और जिले में देखने को नहीं मिलता है।शहर वासियों को इस पर बहुत गर्व था जो कि अब खत्म होता जा रहा है।बाग में लगे फव्वारे बंद पड़े हैं और पौधे भी सूख रहे हैं।जिसे देखने के बाद भी नगर निगम कुंभ करनी नीद में सो रहा है।









