बौद्धिक संपदा अधिकार नवीन विचारों और तकनीकों का सुरक्षा कवच

ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज :
कपूरथला, 27 अप्रैल:

पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के अवसर पर इस वर्ष की थीम “बौद्धिक संपदा और खेलों की एक नई सोच” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान खेल उद्योग में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर पंजाब की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के 200 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया।
इस मौके पर उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साइंस सिटी के डायरेक्टर डॉ. राजेश ग्रोवर ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के मूल उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि ये अधिकार युवाओं में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार रचनाकारों और शोधकर्ताओं के कार्य को मान्यता और लाभ प्रदान करते हैं, जिससे वे अपनी जीविका कमाने में सक्षम बनते हैं। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि खेलों की नई-नई तकनीकों से लेकर आधुनिक उपकरणों, नए डिज़ाइनों और ब्रांडों तक, खेल संस्कृति को आधुनिक रूप देने में बौद्धिक संपदा अधिकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह वैश्विक स्तर पर लोगों को आपस में जोड़ने और प्रेरित करने का काम भी करते हैं।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. हरिकरनदीप कौर, सहायक प्रोफेसर, कानून विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न प्रकार जैसे ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और व्यक्तिगत अधिकारों के बारे में जानकारी दी। डॉ. हरिकरनदीप कौर ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार किस प्रकार खेलों को व्यावसायिक रूप से सुरक्षित रखते हैं, जिससे खेलों से जुड़े लोग इसका लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि एक विद्यार्थी अपनी तकनीकों और विचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से कैसे सुरक्षित रख सकता है और पेटेंट किस तरह से फाइल कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पेटेंट की प्रक्रिया एक नई खोज और उसके लाभों की पहचान से शुरू होती है। इसके बाद उसकी मौलिकता सुनिश्चित करने के लिए पहले से मौजूद तथ्यों की खोज की जाती है। इस अवसर पर डॉ. कौर ने जांच, प्रकाशन और स्वीकृति जैसे विभिन्न चरणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया और बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से अपने विचारों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें प्रभावी समाधानों में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया।

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