कपूरथला( )भाजपा के पूर्व प्रदेश सचिव व भाजपा प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य उमेश शारदा ने मांग की है कि पंजाब सरकार फाइनैंस कमीशन के तहत गांवों के विकास के लिए आने वाली ग्रांट का गांव-गांव का हिसाब सार्वजनिक करे।उमेश शारदा ने कहा कि फाइनैंस कमीशन के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए केंद्र सरकार द्वारा ग्रांट जारी की जाती है।ऑफिशियल डेटा के मुताबिक,14वें फाइनैंस कमीशन के दौरान पंजाब के लिए 4,091.15 करोड़ के अलॉटमेंट में से 3,762.27 करोड़ जारी किए गए,जबकि 15वें फाइनैंस कमीशन के 2020-21 से 2025-26 के समय के दौरान पंजाब के लिए 6,798 करोड़ के अलॉटमेंट में से 6,771.67 करोड़ जारी करने का सैंट्रल रिकॉर्ड है।उन्होंने कहा कि अगर यह रकम केंद्र ने पंजाब को जारी की है,तो इसमें से कितनी रकम गांव की पंचायतों तक पहुंची है और कहां खर्च हुई है?उन्होंने कहा कि सरकार को हर गांव के लिए रकम,जारी की गई,खर्च की गई रकम और बकाया रकम की पूरी डिटेल्स पब्लिक करनी चाहिए।अगर किसी भी लेवल पर सैंट्रल ग्रांट का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया गया है,तो उसकी भी पूरी जांच होनी चाहिए।गांवों के विकास के लिए आने वाला पैसा सड़कों,गलियों,नालियों, स्ट्रीट लाइट,सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए।उमेश शारदा ने मुख्यमंत्री पंजाब से मांग की कि वे लोगों को साफ जवाब दें कि फाइनैंस कमीशन के तहत पंजाब को मिली रकम में से गांवों को कितना पैसा मिला,कहां खर्च हुआ और कितना पैसा अभी बाकी है।इस का पूरा हिसाब-किताब पब्लिक करने से ही लोगों को सही स्थिति का पता चल पाएगा।उमेश शारदा ने ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार केंद्र द्वारा भेजी गई योजनाओं का पैसा विज्ञापन और अपनी साख बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ (जो कि 100% केंद्र पोषित है)और शिक्षा के लिए मिले फंड का श्रेय राज्य सरकार खुद ले रही है।उन्होंने कहा केंद्र सरकार ने पंजाब को ‘विशेष पूंजीगत निवेश सहायता (SASCI) योजना के तहत ₹8,379 करोड़ का 50 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जा चुका है।इसके बावजूद राज्य का कर्ज लगातार बढ़ रहा है।





