*कपूरथला:* आई.के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आईकेजीपीटीयू) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने विश्वविद्यालय में भर्ती अनियमितताओं तथा निजी कॉलेजों को संबद्धता दिए जाने संबंधी आरोपों पर पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग (डीटीई) के प्रधान सचिव से टिप्पणियां एवं रिपोर्ट मांगी हैं। यह कार्रवाई कपूरथला नगर परिषद के पार्षद अमरदीप गुजराल द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत के साथ अमरदीप गुजराल ने दावा किया है कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में विस्तृत दस्तावेजी साक्ष्य भी संलग्न किए हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूरे देश में भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता सबसे बड़े सार्वजनिक मुद्दों में से एक बनी हुई है। एक ओर जहां विभिन्न राज्यों में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित हेराफेरी को लेकर लगातार बहस चल रही है, वहीं शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी में टेक्निकल असिस्टेंटों की भर्ती के दौरान भर्ती नियमों तथा वैधानिक प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन किया गया।
अमरदीप गुजराल ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने स्वयं जांच शुरू करने के बजाय काफी विलंब के बाद मामले को तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के पास भेजा। उनका कहना है कि किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय से जुड़े ऐसे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होना आवश्यक है ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में जनता का विश्वास बना रहे।
शिकायत के अनुसार विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को कथित रूप से बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अनिवार्य स्वीकृति प्राप्त किए बिना एकतरफा निर्णय लेकर बदला गया। आरोप है कि पंजाब सरकार की ग्रुप-बी, ग्रुप-सी एवं ग्रुप-डी श्रेणी की भर्तियों में साक्षात्कार समाप्त करने की नीति के बावजूद टेक्निकल असिस्टेंट पदों के लिए 40 अंकों का इंटरव्यू आयोजित किया गया। शिकायत में परीक्षा प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय एवं पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं का उपयोग करने के बजाय साधारण एमसीक्यू उत्तर-पत्रों का इस्तेमाल किया गया, जिनका मूल्यांकन कर्मचारियों द्वारा मैन्युअली किया गया। अभ्यर्थियों को न तो प्रश्न-पत्र और न ही उत्तर-पत्र की प्रतियां साथ ले जाने की अनुमति दी गई, जिससे वे आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर अपने उत्तरों का सत्यापन नहीं कर सके। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरी परीक्षा के दौरान केवल एक ही प्रश्न-पत्र का उपयोग किया गया।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) विभाग के लगभग 40 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार कार्यालय समय समाप्त होने के बाद शुरू किए गए तथा उनकी कोई समुचित रिकॉर्डिंग नहीं रखी गई। तकनीकी प्रकृति के पद होने के बावजूद किसी प्रकार की प्रायोगिक अथवा कौशल परीक्षा आयोजित नहीं की गई। शिकायत में यह भी आरोप है कि साक्षात्कार वाले दिन ही दस्तावेज सत्यापन समिति में बदलाव किया गया, जिससे कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी विश्वविद्यालय ने कथित रूप से नियमित पदों के विरुद्ध प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) के अभ्यर्थियों को संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर नियुक्त किया, जो भर्ती नियमों के विपरीत बताया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने के लगभग दस महीने बाद एक प्रतीक्षा सूची की अभ्यर्थी को उस श्रेणी में नियुक्ति पत्र जारी किया गया, जिसके लिए उसने मूल रूप से आवेदन ही नहीं किया था।
शिकायत में इस भर्ती प्रक्रिया से संबंधित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रही कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उच्च न्यायालय के निर्देशों पर जारी अपने स्पीकिंग ऑर्डर में पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने भर्ती प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक त्रुटियों और अनियमितताओं को स्वीकार किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह तथ्य स्वयं विजिलेंस ब्यूरो द्वारा विस्तृत और व्यापक जांच की आवश्यकता को और अधिक मजबूत करते हैं।
भर्ती प्रक्रिया के अतिरिक्त शिकायत में वर्ष 2025 के दौरान निजी कॉलेजों को एलाइड एवं हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों की संबद्धता प्रदान किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशंस (एनसीएएचपी) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद विश्वविद्यालय ने संबद्धता आदेश जारी किए। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला वर्तमान में सक्षम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है तथा महत्वपूर्ण चरण में होने के कारण इसका कानूनी महत्व भी अत्यधिक है।
हालांकि अमरदीप गुजराल ने विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई में हुई देरी पर निराशा व्यक्त की है, लेकिन उन्होंने विश्वास जताया है कि पंजाब विजिलेंस निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करेगी, प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों की गहन जांच करेगी, पूरे मामले के तथ्यों को सार्वजनिक करेगी तथा कानून के अनुसार जहां भी जिम्मेदारी बनती होगी, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रधान सचिव से औपचारिक रूप से रिपोर्ट और टिप्पणियां मांगने के साथ ही यह मामला अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। अब विभाग की प्रतिक्रिया तथा उसके बाद विजिलेंस ब्यूरो द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी में भर्ती एवं निजी कॉलेजों को संबद्धता देने से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच प्रारंभ होती है या नहीं।








