गौ सेवा न केवल धार्मिक,बल्कि सामाजिक और आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी है-पंडित/तलवाड़

 

कहा-गौ सेवा मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का स्रोत है

 

 

 

 

ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज :

कपूरथला, 30 नवंबर, 2025:

 

गाय की सेवा को केवल धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। यह एक महान सेवा है जो न केवल मनुष्य के जीवन को संतुलित करती है,बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी बहुत लाभदायक है।ये विचार विश्व हिंदू परिषद जालंधर विभाग के अध्यक्ष नरेश पंडित और जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़ ने एक संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए व्यक्त किए।इन नेताओं ने कहा कि आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में, गाय की सेवा को अपनाना एक ऐसा कार्य है जो हमें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर खुशहाल बना सकता है।नरेश पंडित ने इस बात पर जोर दिया कि गौ सेवा केवल एक पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि गाय की सेवा एक महत्वपूर्ण कार्य है जो न केवल हमें धर्म के मार्ग पर चलने का अवसर प्रदान करती है,बल्कि मानवता के कल्याण में योगदान करने का अवसर भी प्रदान करती है। इसे अपनाना और बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कैसे गौ माता की सेवा करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा करने से मन में शांति और संतोष की भावना पैदा होती है। यह भक्ति का एक उच्चतर रूप है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि गौ माता का सान्निध्य तनाव को कम करता है और व्यक्ति को प्रकृति से जोड़ता है। यह हमें निस्वार्थ सेवा और करुणा का जीवन जीने की शिक्षा देता है। उन्होंने गौ माता के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में गौ माता को पवित्र माना जाता है। वह केवल दूध देने वाली प्राणी नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति और हमारे जीवन का अभिन्न अंग है।इसलिए गौ माता की सेवा हमारा धार्मिक कर्तव्य है।उन्होंने अंत में सभी से अपील की कि गौ माता की सेवा को अपने दैनिक जीवन में शामिल करें,चाहे वह गौशाला में दान देकर हो या व्यक्तिगत रूप से उनकी देखभाल करके,क्योंकि यही एक स्वस्थ और समृद्ध समाज की नींव है।

 

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