श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ, विकसित भारत के लक्ष्य में अहम भूमिका : नायब सिंह सैनी

 

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसकी प्राप्ति में श्रमिक वर्ग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूती श्रमिकों की मेहनत पर आधारित है और इसी के बल पर भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री रविवार को गुरुग्राम के सेक्टर-38 स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक जागरूकता एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने की घोषणा:
संगठित श्रमिकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए किया जाएगा राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन
मुख्यमंत्री ने भारतीय मजदूर संघ द्वारा ऑटो चालकों एवं ड्राइवरों के लिए श्रम कल्याण बोर्ड के गठन की मांग पर घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार संगठित श्रमिकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी। इस बोर्ड के माध्यम से ऑटो चालक एवं ड्राइवरों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सेवा सुरक्षा नियम लागू करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिसके तहत कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि 15 जून तक इस प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए सभी पात्र कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर दिए जाएंगे।
न्यूनतम वेतन में 35% बढ़ोतरी, श्रमिक हितों में हरियाणा बना अग्रणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने गत 8 अप्रैल को कोड ऑन वेजिज के प्रावधानों के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू की है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2005 में न्यूनतम वेतन 2,903 रुपये था, जो 2014 तक बढ़कर 6,289 रुपये हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद जब वर्तमान सरकार ने जनसेवा का दायित्व संभाला, तो श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता दी गई। आज न्यूनतम वेतन बढ़कर 19,425 रुपये हो चुका है। उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस के 10 वर्षों में न्यूनतम वेतन लगभग दोगुना हुआ, वहीं वर्तमान सरकार के 11 वर्षों में यह तीन गुना से भी अधिक बढ़ा है, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता, 40 करोड़ रुपये डीबीटी से खातों में ट्रांसफर : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में हरियाणा की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज प्रदेश विकास के मामले में नई बुलंदियों को छू रहा है और इसका श्रेय मेहनतकश श्रमिकों को जाता है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के परिश्रम के बल पर ही हरियाणा देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास सहित हर आवश्यक जरूरत का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर श्रमिक कल्याण हेतु चलाई जा रही 29 योजनाओं के अंतर्गत 34 हजार 197 लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 40 करोड़ रुपये की राशि भी ट्रांसफर की, जिससे श्रमिकों के जीवन स्तर को और सुदृढ़ किया जा सके।
अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख स्तंभों में श्रम सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था चार प्रमुख स्तंभों—भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमिता पर आधारित होती है। इनमें से श्रम सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि श्रमिकों की मेहनत ही विकास की गति को आगे बढ़ाती है। उन्होंने श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि उनके सशक्तिकरण और सम्मान के बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता।
ई-श्रम पोर्टल से श्रमिकों को योजनाओं का पारदर्शी लाभ, पंजीकरण पर मिल रही प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिससे सभी श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी और पारदर्शिता के साथ मिल सके, इसके लिए नई तकनीक का सहारा लिया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल
की शुरुआत की गई। इस पोर्टल पर देश के असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों का पंजीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा के 54 लाख 32 हजार श्रमिक इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इसके अतिरिक्त, संगठित क्षेत्र में राज्य के 4 लाख 50 हजार प्रतिष्ठानों में 33 लाख 58 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले श्रमिक भाई-बहनों को 1100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक श्रमिकों को पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। यह पंजीकरण अंत्योदय सरल केंद्रों, अंत्योदय भवनों तथा सभी कॉमन सर्विस सेंटरों पर आसानी से कराया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के कल्याणार्थ योजनाओं के बारे में किया जागरूक
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को उनके कल्याणार्थ योजनाओं के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि ईएसआई योजना को 1 जुलाई 2017 से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जो श्रमिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बजट में नए प्रावधानों के तहत “सुरक्षित श्रमिक स्वास्थ्य सिस्टम” शुरू किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की हर वर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच होगी, वहीं पंजीकृत निर्माण श्रमिकोंको ओपीडी, आईपीडी, दवाइयों व जांच सहित व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त दी जाएंगी।
उन्होंने बताया कि मानेसर स्थित ईएसआई अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड का किया जा रहा है और वहां मेडिकल कॉलेज भी स्थापित होगा। साथ ही हरसरू, कादीपुर, वजीराबाद, शाहाबाद मारकंडा और फतेहाबाद में नई ईएसआईसी डिस्पेंसरियां खोली जाएंगी। श्रमिकों के बच्चों की कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा हेतु अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलिकोसिस से प्रभावित श्रमिकों के लिए पुनर्वास नीति लागू की गई है, जिसके तहत अब तक 673 पीड़ितों को 41 करोड़ 74 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष 8 हजार से 20 हजार रुपये, श्रमिक महिलाओं को मातृत्व लाभ, बेटियों के विवाह हेतु कन्यादान सहायता तथा मृत्यु या गंभीर विकलांगता की स्थिति में 5 लाख 15 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

 

 

 

 

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