कपूरथला( )विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि मां-बाप की सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक ग्रंथों में माता-पिता की सेवा को मानव जीवन की सबसे बड़ी सेवा बताया गया है।उन्होंने कहा जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा करती है,उसे जीवन में सदा आशीर्वाद और सफलता प्राप्त होती है।आज की युवा पीढ़ी इस मूलभूत जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं समझ पा रही है।आधुनिकता की दौड़ में परिवारिक मूल्यों और संस्कारों को नजरअंदाज किया जा रहा है,जिसका परिणाम यह है कि संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है।उन्होंने युवाओं से अपील की कि अपनी सभ्यता, संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं को समझें और उनके अनुरूप जीवन व्यतीत करें।माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा केवल कर्तव्य ही नहीं, बल्कि हमारा नैतिक धर्म भी है।जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि माता-पिता की सेवा जीवन का सबसे बड़ा धर्म व सच्चा पुण्य है,क्योंकि भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान के समान दर्जा दिया गया है।उन्होंने कहा कि माता-पिता हमारे जीवन के पहले शिक्षक और मार्गदर्शक होते हैं।उनका त्याग,समर्पण और प्रेम शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।ऐसे में उनकी सेवा करना केवल कर्तव्य ही नहीं, बल्कि सबसे बड़ा पुण्य भी माना गया है।उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार लोग अपने माता-पिता के लिए समय नहीं निकाल पाते,यह स्थिति चिंताजनक है।उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को सबसे अधिक जरूरत अपने बच्चों के स्नेह और सहारे की होती है।उनकी छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखना,सम्मानपूर्वक बात करना और समय-समय पर उनका हालचाल पूछना ही सच्ची सेवा है।धार्मिक ग्रंथों में भी माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया हैं।उनकी दुआएं जीवन की कठिनाइयों को आसान बना देती हैं।समाज को चाहिए कि युवाओं को इस दिशा में जागरूक करे और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाए।माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई तीर्थ,व्रत या दान नहीं है,यही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है।अंत में उन्होंने कहा कि जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां सुख-शांति और समृद्धि स्वयं निवास करती है।अंत में उन्होंने कहा कि जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है,वहां सुख-शांति और समृद्धि स्वयं निवास करती है।