कपूरथला शहर को गंदगी मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी व विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़ ने स्थानीय निवासियों से विशेष अपील की है।शहर की सुंदरता और स्वच्छता केवल प्रशासन या सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती,बल्कि इसके लिए हर नागरिक को खुद जागरूक होना होगा और दूसरों को भी प्रेरित करना होगा।जोगिंदर तलवाड़ ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे आसपास जमा कचरे के ढेर न केवल शहर की छवि खराब करते हैं,बल्कि ये मच्छरों और हानिकारक जीवाणुओं के प्रजनन केंद्र बन जाते हैं।इससे मलेरिया,डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।विशेषकर बरसात के मौसम के बाद यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।अंत में जोगिंदर तलवाड़ ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि हमें स्वच्छ कपूरथला के संकल्प को सिद्ध करना है।उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति और शहर की सुंदरता की कुंजी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी में ही छिपी है।यदि हर व्यक्ति अपने घर के सामने की सफाई सुनिश्चित कर ले,तो पूरा शहर स्वतःही चमक उठेगा।
प्रशासन के साथ नागरिकों का सहयोग अनिवार्य
जोगिंदर तलवाड़ ने चर्चा के दौरान कहा कि अक्सर लोग अपने घरों की सफाई तो करते हैं,लेकिन कूड़ा सड़क पर या खाली प्लॉटों में फेंक देते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा जब तक हम व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे,तब तक शहर को पूरी तरह स्वच्छ बनाना संभव नहीं है।हमें यह समझना होगा कि साफ-सुथरा मोहल्ला न केवल देखने में अच्छा लगता है,बल्कि यह बीमारियों को दूर रखने के लिए भी आवश्यक है।उन्होंने आगे कहा कि केवल सरकार की योजनाओं से बदलाव नहीं आता,बल्कि बदलाव तब आता है
जब समाज का हर वर्ग उसे अपनी प्राथमिकता बना ले।
कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण
जोगिंदर तलवाड़ ने कचरा प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला।उन्हेंनि सुझाव दिया कि लोगों को अपने घरों में ही गीले और सूखे कचरे अलग-अलग करना चाहिए। उन्होंने गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की सलाह दी।पुराने प्लास्टिक,कांच और धातुओं को कचरे के ढेर में फेंकने के बजाय उन्हें रीसाइक्लिंग के लिए देना चाहिए।जोगिंदर तलवाड़ ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को इस मुहिम से जोड़ने की बात कही।उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेजों के स्तर पर सफाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी एक स्वच्छ वातावरण में सांस ले सके।












