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राखी से बंधेगी जिम्मेदारी,भाइयों को लेना होगा नशा छोड़ने का संकल्प-हेंनत कुमार

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ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज

कपूरथला, 27 अगस्त 2026 :

 

 

रक्षाबंधन भाई–बहन के पवित्र प्रेम का त्यौहार है।इस दिन हमें समाज से किसी एक बुराई को खत्म करने का पक्का संकल्प लेना चाहिए।यह अपील आम आदमी पार्टी के हल्का संगठन इंचार्ज हेंनत कुमार ने समूह शहर निवासिओं को रक्षाबंधन की शुभकामनएं देते हुए कही।उन्होंने कहा कि अपनी या अपने परिवार की शादी में कभी भी दहेज न लेने और न देने का संकल्प लें।कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज़ उठाएं और लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने का प्रण लें।घर और समाज में लड़के और लड़की के बीच किसी भी तरह का भेदभाव न करने की शपथ लें।हर महिला का आदर करने और समाज में उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाने का संकल्प लें।उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर रक्षासूत्र बांधने के साथ समाज को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का संकल्प लिया जाएं।उन्होंने कहा भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और त्योहारों की भूमि पर रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है जो केवल भाई–बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं,बल्कि संपूर्ण समाज में आत्मीयता,कर्तव्यबोध और नैतिक मूल्यों के पुनर्संवेदन का पर्व है।यह पर्व नारी अस्मिता,समानता,सुरक्षा और प्रेम की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।राखी का धागा जितना कोमल दिखता है,उतनी ही उसमें गहराई और दृढ़ता होती है, यह एक ऐसा लौकिक बंधन है,जो प्रेम,आदर्शों और जिम्मेदारियों से बंधा होता है।रक्षाबंधन कोई साधारण पर्व नहीं,यह आदर्शों का हिमालय है,संकल्पों का सोपान है।यह पर्व सिर्फ भाई–बहन के प्रेम की रस्म नहीं,बल्कि पुरुष समाज द्वारा नारी को आश्वस्त करने,उसका मान–सम्मान बनाए रखने की शपथ का दिन है।यह दिन हमें याद दिलाता है कि नारी केवल स्नेह की पात्र नहीं,वह शक्ति,श्रद्धा और समाज की दिशा तय करने वाली एक सशक्त प्रेरणा भी है।हेंनत कुमार ने कहा आज जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में बुलंदियों को छू रही हैं,सेना से लेकर विज्ञान,शिक्षा से लेकर खेल तक तब रक्षाबंधन उन्हें केवल भावनात्मक सुरक्षा नहीं,सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सम्मान दिलाने का भी माध्यम बनता है।रक्षाबंधन की महत्ता को समझने के लिए उसके ऐतिहासिक संदर्भों को जानना आवश्यक है।भविष्य पुराण में उल्लिखित कथा के अनुसार जब देव–दानव युद्ध में दानव भारी पड़ने लगे,तब इंद्राणी ने अपने पति इन्द्र की रक्षा हेतु रेशम का धागा मंत्रों के साथ उनके हाथ पर बांधा,जिससे इंद्र विजयी हुए।

 

 

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