जब-जब कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी के लिए गाली और अपशब्दों का प्रयोग किया है,तब-तब मोदी जी की लोकप्रियता और बढ़ी है-भाजपा
ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज
कपूरथला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी की आलोचना करते हुए भाजपा के प्रदेश नेता उमेश शारदा ने कांग्रेस पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पहले भी प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर चुके हैं।शारदा ने कहा कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस में हताशा बढ़ी है और पार्टी की राजनीति में मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियां हावी हो रही हैं।उन्होंने कहा जब-जब कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी के लिए गाली और अपशब्दों का प्रयोग किया है,तब-तब उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी।यहां तक कि पीएम मोदी को अपशब्द और गाली देने में कांग्रेस के प्रमुख नेता सोनिया गांधी,राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पीछे नहीं रहे।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में लगातार मिल रही चुनावी हार से कांग्रेस पार्टी में हताशा व निराशा इतनी बढ़ चुकी है कि अब उसके पास न कोई नीति बची है,न कोई मुद्दा,बस गाली-गलौज की राजनीति बची है। जनता के बीच जनाधार खो चुकी कांग्रेस,अब अपने कार्यकर्ताओं में भी आधार खोती जा रही है।शारदा ने यह भी दावा किया कि जब-जब इन्होंने मोदी जी या उनके परिवार पर घृणित टिप्पणियां की हैं,तब-तब जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।शारदा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जाने-अनजाने भारत विरोधी ताकतों के हाथों में खेलते नजर आने का आरोप लगाया और कहा कि हिंसा और अराजकता की आग में देश को झोंककर बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाने का ख्वाब देख रही कांग्रेस ने अब अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल करने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है।इस दौरान शारदा ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रही कांग्रेस,उसके राजनीतिक सहयोगियों और अन्य संगठनों को जमकर खरी-खोटी सुनायी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है इसलिये स्वाभाविक है कि तमाम शक्तियों को भारत का यह उभार रास नहीं आ रहा होगा।शारदा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा देश को यह समझने की आवश्यकता है कि दशकों से चुनाव हार रहे राजनीतिक दल जाने या अनजाने में आज इन(भारत विरोधी)शक्तियों के हाथों में खेलते हुए नजर आ रहे हैं।उन्होंने दिल्ली में जारी प्रदर्शन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आज स्पष्ट हो गया है दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है वह अराजकता द्वारा भारत की प्रगति को पटरी से उतारने का एक निंदनीय प्रयास है।उन्होंने कहा कि चौरी-चौरा में हिंसा हो जाने मात्र से ही महात्मा गांधी ने अपना पूरा असहयोग आंदोलन रोक दिया था लेकिन खुद को महात्मा गांधी की उत्तराधिकारी बताने वाली कांग्रेस हिंसा और अराजकता के द्वारा सत्ता परिवर्तन जैसी बातें करके अपने राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहती है।उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के नैतिक मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा है।उन्होंने कहा सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है,इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उनकी यह लड़ाई चुनाव सुधार या मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) से जुड़े मुद्दों के लिए नहीं है।उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने,संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है और उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी भी इसी ओर संकेत है।उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुझाव देते हुए कहा कि उन्हें लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर विध्वंस की राजनीति करने के बजाय जनमत का सम्मान करते हुए अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए।शारदा ने कहा कि जहां तक भारत के भविष्य का प्रश्न है तो उसकी जिम्मेदारी सभी की है।उन्होंने कहा हमें टकराव नहीं संवाद और राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुनना है।शारदा ने कहा कि निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी को पहले कांग्रेस के शासनकाल में आयोग की भूमिका और नियुक्तियों पर जवाब देना चाहिए।शारदा ने आरोप लगाया कि वर्ष 1993 में कांग्रेस सरकार ने रातोंरात दो निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए थे।उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन.गोपालस्वामी की ओर से निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि चावला ने आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी।शारदा ने दावा किया कि कांग्रेस ने चावला को न केवल संरक्षण दिया बल्कि बाद में उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनाया।उन्होंने पूर्व निर्वाचन आयुक्त एमएस गिल का भी जिक्र किया,जो बाद में केंद्र सरकार में मंत्री बने।राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर शारदा ने कहा कि कांग्रेस के पास अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सुबूत नहीं हैं और यही वजह है कि उनकी अपनी ही पार्टी ने मतदाता सूची के खिलाफ एक भी औपचारिक अपील दाखिल नहीं की।






