



पटियाला के बादशाहपुर में पुलिस चाैकी में देर रात को धमाका हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इससे पहले अमृतसर और गुरदासपुर में भी पुलिस थानों और चाैकियों में कई धमाके हो चुके हैं। पंजाब में पिछले तीन महीनों में बम ब्लास्ट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अभी तक ब्लास्ट के मामले माझा में ही सामने आ रहे थे। पहली बार मालवा में ऐसा धमाका हुआ है। पंजाब में अब तक हुए बम हमले–03 फरवरी को अमृतसर के फतेहगढ़ चूड़ियां रोड पर बंद पुलिस चौकी पर धमाका। 19 जनवरी को अमृतसर की गुमटाला चौकी पर धमाका हुआ था। 21 दिसंबर को गुरदासपुर के कलानौर क्षेत्र में बंगा वडाला गांव की पुलिस चौकी रात को ब्लास्ट हुआ था। 19 दिसंबर को पंजाब के भारत–पाक सीमा से सटे गुरदासपुर जिले की बंद पड़ी पुलिस चौकी बख्शीवाला पर आतंकी हमला हुआ। 17 दिसंबर को इस्लामाबाद थाने में ग्रेनेड विस्फोट किया गया।13 दिसंबर को अलीवाल बटाला थाने में ग्रेनेड विस्फोट हुआ था। 4 दिसंबर को मजीठा थाने में ग्रेनेड विस्फोट हुआ तो पुलिस ने हमला मानने से ही इनकार कर दिया। 2 दिसंबर को एसबीएस नगर के काठगढ़ थाने में ग्रेनेड विस्फोट हुआ था। 27 नवंबर को गुरबख्श नगर में बंद पुलिस चौकी में ग्रेनेड विस्फोट हुआ था। 24 नवंबर को अजनाला थाने के बाहर आरडीएक्स लगाया गया था। हालांकि, यह फटा नहीं। 24 नवंबर को अजनाला थाने के बाहर आरडीएक्स लगाया गया था। हालांकि, यह फटा नहीं। इसकी जिम्मेदारी हैप्पी पासियां ने ली थी। इस मामले में पुलिस दो आरोपी भी पकड़े हैं।राज्य में लगातार बढ़ रहे आतंकी हमलों पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने हाल ही में पंजाब पुलिस के साथ एक नई रिपोर्ट साझा की थी। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब के पुलिस थानों को टारगेट कर आतंकी संगठनों द्वारा कराए जा रहे ग्रेनेड और आईईडी ब्लास्ट हमलों को लेकर खुलासा किया था।रिपोर्ट में एनआईए ने दावा किया है कि इन धमाकों को अंजाम देने के लिए खालिस्तानी आतंकी संगठन डेड ड्रॉप मॉडल को अपना रहे हैं। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि डेड ड्रॉप मॉडल में जब भी खालिस्तानी या आतंकी संगठनों को किसी बड़ी साजिश को अंजाम देना होता है, उससे पहले वह अपना टारगेट चुनते हैं।टारगेट की पहचान कर इस साजिश को अंजाम देने के लिए विदेश या देश में बैठे अपने हैंडलरों के जरिये उस एरिया से अपने नेटवर्क के भरोसेमंद गुर्गे को चुनते हैं। इसके बाद यह आतंकी संगठन अपने डेड ड्रॉप मॉडल यानी वो खुफिया जगह जो उनके हैंडलर या नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटिव को पता होती है, वहां पर हथियार और गोला–बारूद पहुंचाकर घटना को अंजाम देते हैं।