लुधियाना से आए थे वृंदावन 120 श्रद्धालु, 30 गए थे नाव पर; चार दिन का था प्लान

 

 

लुधियाना जिले के जगराओं से बांके बिहारी समूह के 120 श्रद्धालु वृंदावन के लिए रवाना हुए थे। शुक्रवार की दोपहर करीब तीन बजे यमुना नदी में एक नाव अस्थायी पीपा पुल से टकराकर डूब गई। इस हादसे में दस श्रद्धालुओं की मौत हुई, दस से ज्यादा लापता और आठ को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।मरने वालों में छह महिलाएं और चार पुरुष हैं। जगराओं के छब्बीस वर्षीय नौजवान इशान कटारिया, प्रबंधक मधुर बहल और उनकी मां कविता बहल भी मृतकों में हैं। अड्डा रायकोट के काला बुक शॉप के मालिक चरणजीत सिंह उर्फ काला और उनकी पत्नी भी शामिल हैं। सुरक्षित निकाले गए लोगों में जगराओं के सुनील कुमार की पत्नी, यशु पुत्र रमेश बजाज और लवेश हैं। उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। यात्रा चार दिन की थी, किराया चार हजार पांच सौ रुपये था। ज्यादातर श्रद्धालु रात के सफर के बाद थके थे, इसलिए धर्मशाला में आराम कर रहे थे। करीब तीस श्रद्धालु, जिनमें युवा शामिल थे, बांके बिहारी मंदिर दर्शन के बाद यमुना में गए थे, मल्होत्रा मोबाइल दुकान के श्वेत जैन ने बताया कि यमुना में पीपों का पुल था। जलस्तर बढ़ने के बाद इन्हें खोला गया, जिससे ये पुल बहने लगे। इन्हीं बहते पुलों से टकराकर नाव पलटी। जैन के अनुसार, उन्होंने नाविक से नाव रोकने को कहा था, पर उसने नहीं रोका और टक्कर हुई।हादसे के बाद आसपास के नाविकों ने कई लोगों को बचाया। जगराओं के ज्यादातर श्रद्धालु फोगला आश्रम के पास रुके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता ने बताया कि हादसे की जानकारी पर आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने यमुना तट से करीब दो किलोमीटर तक का क्षेत्र घेराबंदी करके बंद कर दिया।

 

 

 

 

 

 

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