नई दिल्ली, 13 अगस्त, 2026: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने आज यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे गुरुद्वारा साहिब की पवित्र मर्यादा तथा गुरसिखी के मूल सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब के अंदर या गुरसिखी के नाम पर किसी भी व्यक्ति पर हमला करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसकी कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग गुरु साहिब के बाणे में सजते हैं, उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे गुरु साहिब की शिक्षाओं के अनुरूप मीरी-पीरी की परंपरा को आगे बढ़ाएं, न कि किसी पर अत्याचार या हिंसा करें।
उन्होंने कहा कि आज हुई यह घटना बेहद निंदनीय है और इसकी जितनी भी कड़े शब्दों में निंदा की जाए, कम है। उन्होंने सरदार सुखबीर सिंह बादल के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए अरदास करते हुए कहा कि गुरु साहिब उन्हें जल्द पूर्ण स्वास्थ्य और चढ़दी कला प्रदान करें।
सरदार कालका ने कहा कि इस प्रकार के हमले कायरता की निशानी हैं और गुरसिखी के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि अतीत में भी गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार की घटनाएं सामने आई हैं, जो बेहद दुखद और गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों की पवित्रता और सिख स्वरूप व बाणे के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी से अपील की कि गुरु साहिब की शिक्षाओं को समझें और उनका पालन करते हुए शांति, भाईचारे तथा आपसी सम्मान के मार्ग पर चलें।
सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि गुरुद्वारों की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा करना प्रत्येक सिख की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सिख बाणे या धार्मिक पहचान की आड़ में किसी भी प्रकार की हिंसा या हमले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। ऐसी घटनाओं से न केवल सिख संगत की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, बल्कि गुरुद्वारा साहिब की पवित्र मर्यादा भी प्रभावित होती है।
सरदार काहलों ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब किसी भी प्रकार की हिंसा, निजी रंजिश या टकराव का मंच नहीं बन सकता। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता सुरक्षित रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।









