कोलकाता। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार के खिलाफ माहौल है। अधीर रंजन चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “सत्ता–विरोधी लहर तो है, लेकिन इसका फायदा किस पार्टी को मिलेगा, यह अभी कहना मुश्किल है, क्योंकि विपक्ष के वोट बंट सकते हैं। अगर तृणमूल कांग्रेस के वोट एकजुट रहते हैं तो उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। फिर भी, एक बात साफ है कि बंगाल में सत्ता–विरोधी लहर है, और असली सवाल यह है कि इसका लाभ किसे मिलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “पहली बार हम ममता बनर्जी को बेचैन होकर इधर–उधर घूमते और मतदाताओं से बातचीत करते देख रहे हैं। यह पहली बार है जब हम उन्हें अपने क्षेत्र में एक बूथ से दूसरे बूथ तक जाते हुए देख रहे हैं। यह अभूतपूर्व है। मुझे लगता है कि सीएम ममता बनर्जी को अपनी जीत का भरोसा नहीं है, इसलिए वह इतनी बेचैन नजर आ रही हैं।“
दूसरे फेस के मतदान के दौरान दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तनाव की खबरें आईं, जहां केंद्रीय बलों को उग्र तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को तितर–बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच एक हाई–प्रोफाइल मुकाबला देखने को मिला।
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के पास स्थित कालीघाट इलाके में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जहां तृणमूल कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारी के खिलाफ नारे लगाए।
इस घटना के बाद अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास इन घटनाओं के संबंध में शिकायत दर्ज कराई।
संयोग से यह मतदान प्रतिशत 2024 के सात चरणों वाले लोकसभा चुनावों में इसी अवधि के दौरान दर्ज किए गए 45.10 प्रतिशत के औसत से काफी अधिक है।
हालांकि, सुबह से ही कुछ इलाकों में चुनाव से जुड़ी हिंसा और गड़बड़ी की खबरें आई हैं, लेकिन किसी के घायल होने, गंभीर रूप से चोट लगने या बड़े पैमाने पर मतदाताओं को डराने–धमकाने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। इसका श्रेय काफी हद तक केंद्रीय बलों की सतर्क निगरानी को दिया जा रहा है, जो 142 सामान्य पर्यवेक्षकों और 95 पुलिस पर्यवेक्षकों की कड़ी निगरानी में काम कर रहे हैं। इस बार यह संख्या पहले चरण के 84 से अधिक है।














