फिर हुई पाकिस्तान की फजीहत, खुद ही थपथपा ली अपनी पीठ, आतंकी देश पर भरोसा किसी को नहीं

 

 

आतंकी देश पाकिस्तान की रग-रग से सभी बाकिफ हैं। सभी को पता है कि पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं। जिस घर में खाने तक के लाले हों, उस पर भरोसा उसके समान है, जैसे बिल्ली से दूध की रखवाली करवाना। अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच मध्यस्थता करवाने का दम भरने वाला पाकिस्तान खुद ही अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन उस पर भरोसा किसी को नहीं है।

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार का कहना है कि पाकिस्तान भरोसे के काबिल नहीं है। क्योंकि देखने वाली बात यह है कि अगर सच में पाकिस्तान के दम पर युद्धविराम हुआ होता, तो चंद घंटे बाद इजरायल लेबनान पर हमला न करता। यहीं से पता चलता है कि दुनिया में पाकिस्तान कितनी चलती है। बता दें कि 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान डोनाल्ड ट्रंप और ईरान ने किया है, लेकिन यह सीजफायर चंद घंटों में ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। इजरायल ने लेबनान पर हमला कर हिजबुल्लाह को आगाह किया कि वह उसे छोडऩे वाला नहीं है। इसी बीच ईरान ने कह दिया कि इजरायल ने संघर्षविराम का उल्लंघन किया है, लेकिन इजरायल का दावा है कि सीजफायर में लेबनान का उल्लेख नहीं है। अब इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को शांति वार्ता का दौर शुरू होने वाला है, लेकिन क्या यह वार्ता सफल होगी। यह कल होने वाली मीटिंग में पता चल जाएगा।

मास्को। लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 254 लोग मारे गए और 1,165 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी अल जज़ीरा ने लेबनानी नागरिक सुरक्षा के हवाले से गुरुवार को दी। बुधवार को, इजरायली विमानों ने मध्य बेरूत के मजऱा, मनारा, ऐन अल मरेसेह और बरबोर इलाकों के साथ-साथ दक्षिणी उपनगरों के आठ इलाकों पर हमला किया। लेबनानी आंदोलन हिजबुल्लाह ने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान पर की गई बमबारी आंदोलन को जवाबी कार्रवाई का अधिकार देती है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हम लेबनान पर इजरायल के बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा करते हैं जिनके परिणामस्वरूप भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। ये हमले देश में मानवीय स्थिति को और भी बदतर बना रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में घोषित युद्धविराम के बावजूद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लगातार कमजोर कर रही है।

वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ एक निजी बैठक के बाद, ईरान युद्ध में अमरीका का समर्थन न करने के लिए नाटो की फिर से आलोचना की। बैठक के बाद ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक पोस्ट में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि जब हमें नाटो की जरूरत थी तब वे मौजूद नहीं थे और अगर हमें उनकी फिर से जरूरत पड़ी तो वे मौजूद नहीं होंगे। इस बीच, स्पष्ट मतभेदों के बावजूद श्री रुट्टे ने सीएनएन को ट्रंप के साथ अपनी मुलाकात को बहुत स्पष्ट और बहुत खुला करार दिया।

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