हथियारों व गैंगवार संस्कृति को बढ़ावा देने वाली फिल्मों, गीतों व सोशल मीडिया वीडियो पर पूर्ण प्रतिबंध लगे-पंडित/अरोड़ा

 

 

ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज :

कपूरथला

 

आज के डिजिटल और तकनीकी युग में फिल्में, गीत और सोशल मीडिया युवाओं की सोच,व्यवहार और जीवन दृष्टि को प्रभाषित करने वाले सबसे शक्तिशाली माध्यम बन चुके हैं।मनोरंजन के नाम पर प्रस्तुत किया जाने  के अवसर युवाओ के लिए रोल मॉडल तय करता है,जिस का सीधा प्रभाव उनके निर्णयों और भविष्य की दिशा पर पड़ता है।लेकिन जब यही माध्यम हथियारों के प्रदर्शन, गैंगवार की शान शौकत और अपराधी जीवन-शैली को रुतबा,ताकत और सफलता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने लगते हैं,तो यह मनोरंजन की सीमा लांधकर एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाता है।ऐसी प्रस्तुति न केवल सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाती है,बल्कि युवा मनों में हिंसा,भय और गलत रास्तों को सामान्य मानने की सोच भी पैदा करती है।यह बात विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के अध्क्ष्य नरेश पंडित व जिला खजांची राजकुमार अरोड़ा ने एक प्रेस बयान जारी कर कही।उन्होंने कहा कि हथियारों और गैंगवार करने वाली फिल्में और गीत युवाओं की सोच को गलत दिशा में ले जा रहे हैं।जब अपराधियों को हीरो बनकर पेश किया जाता है,तो युवाओ में यह भ्रम पैदा होता है कि डर और हिंसा के जरिए ही सम्मान और पहचान हासिल की जा सकती है।उन्होंने कहा कि ऐसे कंटेंट के कारण कई युवा कम उम्र में ही अपराध की ओर आकर्षित हो रहे हैं।नरेश पंडित का मानना है कि सोशल मीडिया ने हथियारों और गैंगवार संस्कृति को  घर-घर तक तक पहुंचा दिया है।छोटी-छोटी वीडियो में हथियार दिखाकर महिमामंडित एक ट्रेंड बनता जा रहा है।लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ में लोग सामाजिक जिम्मेदारी को भूलते जा रहे हैं।यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई,तो यह प्रवृत्ति समाज में अस्थिरता और अपराध को और बढ़ावा देगी।नरेश पंडित ने कहा कि हथियारों की शान बढ़ाने वाले दृश्य हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत हैं।हमारी धरती ने हमेशा शांति सहनशीलता और भाईचारे का संदेश दिया है,लेकिन इस तरह का कंटेंट नफरत और हिंसा को सामान्य बना रहा है।उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए युवाओं के सामने सकारात्मक चरित्र और प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत करना बेहद आवश्यक है।नरेश पंडित ने कहा कि कानूनी प्रतिबंध के साथ-साथ सामाजिक जागरुकता भी उतनी ही जरूरी है।माता-पिता,स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर युवाओं को यह समझाना चाहिए कि वास्तविक सफलता हिंसा या भय में नहीं,बल्कि शिक्षा, मेहनत और अच्छे चरित्र में है।नुकसानदायक कंटेट पर सख्त निगरानी और प्रतिबंध समय की सबसे बड़ी जरूरत है।अंत में यह कहना उचित होगा कि हथियारों और गैंगवार संस्कृति को बढ़ावा देने वाली फिल्में,गीत और सोशल मीडिया वीडियो समाज के ताने बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं।युवाओ के भविष्य और समाज में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे कंटेंट पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ साथ सकारात्मक सोच और जागरूकता को प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है।सामूहिक प्रयासों से ही एक सुरक्षित और सशकत समाज का निर्माण संभव है।

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