Tribune Times

Tribune Times

रिश्वतखोरी रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान की जरूरत-कशयप/एडवोकेट शर्मा

SHARE:

 

रिश्वतखोरी देश की जड़ों को कमजोर करती है–शिव सेना 

 

बोले–रिश्वतखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए तुरंत न्याय जरूरी

 

कपूरथला()भारत में रिश्वतखोरी एक ऐसी गंभीर सामाजिक, आर्थिक और नैतिक समस्या बन चुकी है,जिसकी जड़ें हमारे समाज की नस–नस में गहरी उतर गई हैं।रोजाना हो रही रिश्वतखोरों की धर–पकड़ की घटनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह बुराई अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि हर स्तर पर फैल चुकी है।आज हालात यह हैं कि रिश्वतखोर को समाज में योग्य समझदार और कमाने वाला बेटा जैसे विशेषणों से नवाजा जाता है,जबकि ईमानदार व्यक्ति को सनकी या पागल की संज्ञा दी जाती है।यह भ्रष्टाचार आम जनता के छोटे–छोटे दायरे से लेकर उच्व अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं तक अपना जाल फैला चुका है।हालात इतने खराब हो गए हैं कि आम जनजीवन के साधारण काम भी बिना रिश्वत के सही ढंग से नहीं हो रहे।यह स्थिति देश के लोकतंत्र और प्रशासनिक प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।रिश्वतखोरी के खिलाफ लड़ाई कोई एक दिन की लड़ाई नहीं,बल्कि यह एक निरंतर और लंबे समय तक चलने वाला अभियान है।इस सबंधी शिव सेना बाला साहिब ठाकरे शिंदे ग्रुप के पूर्व जिलाध्क्षय मुकेश कश्यप व शिव सेना नेता एडवोकेट रविकांत शर्मा  ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश को किसी की चिंता नहीं,बल्कि हर कोई दोनों हाथों से लूटने में लगा हुआ है।उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप देश में रिश्वतखोरी लगातार बढ़ती ही जा रही है।रिश्वत लेने वालों को किसी प्रकार का कोई डर नहीं,क्योंकि रिश्वत लेकर पकड़ा जाने वाला व्यक्ति भी रिश्वत देकर ही छूट जाता है।मुकेश कश्यप ने जोर दिया कि रिश्वतखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे मामलों में तुरंत न्याय मिले।उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए विशेष अदालतों की स्थापना करनी चाहिए,जो केवल भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की सुनवाई और फैसला लें।इसके साथ ही,गवाहों की सुरक्षा सबूतों की त्वरित जांच और निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जाए।उन्होंने   जोर देते हुए कहा कि रिश्वतखोरी को रोकने के लिए इसके खिलाफ एक बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की सख्त आवश्यकता है।उन्होंने मांग की कि सरकार को कानून का पालन सुनिश्चित करना होगा और उन अधिकारियों को सख्त सजाएं देनी होंगी जो रिश्वत लेते हुए पाए जाते हैं।मुकेश कश्यप ने सुझाव दिया कि उचित जांच प्रणाली,प्रौद्योगिकी का उपयोग और जवाबदेही की प्रणाली को मजबूत करना होगा।उन्होंने कहा कि रिश्वतखोरी के मामलों की सुनवाई सालों तक चलती रहती है।कई बार दोषी सजा से पहले ही जमानत पर आ जाते हैं या सबूतों की कमी के कारण छूट जाते हैं।यह तरीका भ्रष्ट लोगों के मनोबल को और बढ़ाता है।जिसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने कहा जब तक पूरे समाज से इस बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प नहीं लिया जाता,तब तक इसे पूरी तरह समाप्त करना असंभव है।मुकेश कश्यप ने कहा कि रिश्वतखोरी सिर्फ आम लोगों को ही नहीं,बल्कि देश की अर्थव्यवस्था,शिक्षा प्रणाली,स्वास्थ्य सेवाओं और न्याय प्रणाली को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।उन्होंने बताया कि रिश्वत के आधार पर जो अयोग्य व्यक्ति पदों पर पहुंचते हैं,वे अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने के बजाय और भ्रष्ट किरदारों को जन्म देते हैं।इस तरह एक लंबी श्रृंखला बन जाती है जो सिस्टम को अंदर से खोखला कर रही है।मुकेश कश्यप ने कहा कि रिश्वतखोरी एक ऐसा रोग बन चुका है जो समाज,अर्थव्यवस्था और नैतिकता तीनों को अंदर से खोखला कर रहा है।भले ही रिश्वत के खिलाफ कई सख्त कानून बनाए गए हैं,लेकिन फिर भी असल मैदान में यह समस्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है।उन्होंने कहा कि रिश्वतखोरी एक ऐसी समस्या है जो किसी भी देश की जड़ों को कमजोर कर देती है।यह न सिर्फ आम नागरिक के जीवन पर बुरा प्रभाव डालती है,बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, नैतिकता और भरोसे को भी चुनौती देती है।उन्होंने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि असल में कुछ गिनती के चालाक लोगों ने पूरे देश में ऐसा सिस्टम बना दिया है कि आम आदमी को अपने और अपने परिवार के पालन–पोषण के लिए इस तरह के चक्रव्यूह में फंसा दिया है कि उसके पास ऐसे सिस्टम से न तो उलझने का समय है और न ही ताकत।इसका फायदा वे लोग उठा रहे हैं।

 

 

 

 

trfgcvkj.blkjhgfd
1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें