पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा हत्याकांड मामले में कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार और डीएसपी हरजिंदर सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई को मामले में अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी के संबंध में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के बाद मामला लगातार चर्चा में रहा है। इस घटना को लेकर परिवार और विभिन्न पक्षों की ओर से कार्रवाई की मांग उठाई गई थी। मामले में पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।अब ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार और डीएसपी हरजिंदर सिंह के निलंबन से मामले में प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने का संकेत मिला है। हालांकि, दोनों अधिकारियों को सस्पेंड करने के आधिकारिक आदेश, निलंबन के विस्तृत कारण और विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं, मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम भी मानसा पहुंच गई है।परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच तेज हो गई है। मामले में फॉरेंसिक एफएसएल की टीमें घटनास्थल पर पहुंचकर जांच कर रही हैं। टीमों की ओर से घटनास्थल से विभिन्न नमूने एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्यों की जांच की जा सके। एफएसएल टीम द्वारा जुटाए गए नमूनों की जांच से मामले की तह तक पहुंचने और जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।वहीं, परविंदर झोटा की पत्नी ने स्टेज से धरने को संबोधित करते हुए कहा कि आरोपी अश्वनी की दुकान को गिराने संबंधी परिवार की कोई मांग नहीं थी, जिला प्रशासन व सरकार ने दुकान को गिराकर एक तरह से सबूत नष्ट करने का प्रयास किया है। इसके अलावा झोटा की पत्नी ने कहा सीबीआई अधिकारियों के साथ परिवार की बैठक हुई थी, जिसमें झोटा क़े शव का पोस्टमार्टम करवाने संबंधी चर्चा हुई थी, लेकिन परिवार ने कोई सहमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि हमारा परिवार धरने से जुड़े आम लोगों व कमेटी की राय ले रहा है। इसके बाद ही पोस्टमार्टम करवाने की सहमति बनेगी।







