कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने राज्य में बिगड़ते नशीले पदार्थों के संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई। ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, उन्होंने CRPF के एक जवान के वायरल वीडियो का जिक्र किया। इस वीडियो में जवान ने नशीले पदार्थों की उपलब्धता के खिलाफ आवाज उठाई थी और बताया था कि ऐसा करने पर उसे राज्य प्रशासन की ओर से डराया–धमकाया गया और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई। वड़िंग ने सवाल उठाया कि क्या पंजाब में नशीले पदार्थों के सेवन की सच्चाई सामने लाना अब राज्य प्रशासन की नजर में एक अपराध बन गया है?
वारिंग ने भगवंत मान सरकार पर आरोप लगाया कि वह उन नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं को दबा रही है जो स्थानीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करने की हिम्मत करते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज़ उठाने पर कोई ठोस समाधान निकालने के बजाय, पुलिस कार्रवाई की जाती है या लोगों को परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज का पंजाब यही है… नशाखोरी रुक नहीं रही है, बल्कि इसके खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को दबाया जा रहा है। यह सवाल किसी आम नागरिक ने नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा में तैनात CRPF के एक जवान ने उठाया है। नशे के खिलाफ बोलें तो जेल जाना पड़ता है, सवाल पूछें तो कार्रवाई का सामना करना पड़ता है – भगवंत मान, पंजाब में सच बोलना कब से अपराध हो गया?
यह विवाद राज्य भर में हुई कई गंभीर घटनाओं के बाद खड़ा हुआ है। इनमें नशा–विरोधी कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित हमले और उनकी हत्याएं (जैसे मानसा में प्रमुख कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या) शामिल हैं, साथ ही पीड़ित परिवारों द्वारा किए गए सार्वजनिक विरोध–प्रदर्शन भी हुए हैं। बिगड़ती कानून–व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखी आलोचना की है। इसके चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब में नशीले पदार्थों से जुड़ी हिंसा और आत्महत्याओं के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।






