ऑस्ट्रेलिया में रोजगार का सपना दिखाकर पंजाब और राजस्थान के 34 युवा इंडोनेशिया के दिली तिमोर–लेस्ते द्वीप में फंसे हैं। एजेंटों ने परिवारों से करीब 3 करोड़ रुपये की ठगी की है। पीड़ित परिवारों ने राज्यसभा सदस्य पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल से युवाओं की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है।ये युवा पिछले पांच से छह महीनों से तिमोर–लेस्ते में फंसे हुए हैं। एजेंटों ने प्रत्येक परिवार से 5 से 11 लाख रुपये लिए। इसके लिए परिवारों ने घर, जमीन और गहने गिरवी रखे या कर्ज लिया। युवाओं को भारत के विभिन्न हवाई अड्डों से बाली और मलयेशिया के रास्ते दिली तिमोर–लेस्ते भेजा गया। वहां एजेंटों ने उन्हें गांव बाघापुराना के विजय नामक व्यक्ति के हवाले कर उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए। परिवारों ने आरोप लगाया कि युवाओं को बंधक बनाकर रखा गया। उन्हें डराया–धमकाया गया, इच्छा के विरुद्ध मजदूरी करवाई गई और भोजन भी नहीं मिला। युवाओं के एकजुट विरोध के बाद उन्हें पासपोर्ट वापस मिले। स्थानीय पुलिस ने विजय को हिरासत में लिया है। करीब 10 युवा अपने खर्च पर भारत लौट चुके हैं, जबकि 34 अभी भी तिमोर–लेस्ते में फंसे हैं।यह मामला तब सामने आया जब फंसे युवाओं ने वीडियो जारी कर संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई। संत सीचेवाल इस समय इंग्लैंड में हैं। उन्होंने वहीं से भारत के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। युवाओं की भारत वापसी के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जालंधर के संदीप सिंह और राजप्रीत सिंह उन 10 युवाओं में से हैं जो संघर्ष के बाद भारत लौटे हैं। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट छीनने के बाद उन्हें डराया–धमकाया जाता था और इच्छा के विरुद्ध काम करवाया जाता था। उन्हें मेहनत की कमाई नहीं दी जाती थी और कई बार कम भोजन में गुजारा करना पड़ता था। युवाओं ने दावा किया कि विजय द्वारा पहले भी कई युवाओं को वहां बंधक बनाकर रखा गया था।








