ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज :
कपूरथला 8 अप्रैल ,
महाराष्ट्र की सरकार ने गाय माता को लेकर देसी गायों को औपचारिक रूप से राज्य माता का दर्जा दिया है। अब गाय को राज्य माता का दर्जा देने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बन गया है।उसी को देखते हुए भारत के प्राचीन काल से ही भारत में लोगों की जिंदगी में गायों का अहम स्थान रहा है।वहीं गाय का वैज्ञानिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।स्वामी विवेकानंद ने भी गाय को पशु नहीं माता का दर्जा दिया था।गाय सिर्फ हमारी और भारत की नहीं,पूरे विश्व की माता है।इस सबंधी विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के मंत्री नरेश पंडित,जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़ व बजरंग दल के प्रदेश ब्लोपासना प्रमुख मुनीश बजरंगी ने कहा कि भारत में गौ माता सदियों से समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक रही है।हमारी संस्कृति और पर्यावरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।धर्म शास्त्रों के अनुसार भी गौ माता पूरे विश्व की माता है।जन और राष्ट्र कल्याण के लिए उनकी वास्तविक सेवा और उन्हें राज्य माता का दर्जा मिलना चाहिए।हिन्दू नेताओ ने एक सुर से गाय माता को सभी राज्यों की सरकारों से राज्य की गौमाता का दर्जा देने की मांग शुरू कर दी है।उन्होंने कहा सनातन धर्म में गौहत्या महापाप है।इसलिए सभी राज्यों की सरकारें महाराष्ट्र सरकार की तरह गौमाता को राज्य माता का दर्जा दें।अगर सभी राज्यों की सरकारें गौमाता को राज्य माता का दर्जा देती हैं तो सभी राज्यों में गाय की सुरक्षा और सम्मान बढ़ेगा।नरेश पंडित ने कहा कि भारत की संस्कृति और हिंदुत्व में गाय की बड़ी महिमा है।इसलिए गाय के संरक्षण के लिए सभी राज्यों की सरकारों द्वारा उसको राज्य माता का दर्जा दिया जाना चाहिए।वहीं राज्यों की सरकारों को गौ तस्करों के लिए एक कानून भी लागू करना चाहिए जिससे गौ तस्करों पर लगाम लग सके।उन्होंने कहा कि सदियों से गाय के गोबर का उपयोग खाद के रूप में किया जाता रहा है,जो पर्यावरण प्राकृतिक को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी को समृद्ध करता है।गाय केवल एक पशु नहीं,बल्कि एक दिव्य प्राणी है,जो जीवन को बनाए रखने और पोषित करने की शक्ति रखती है।इसलिए गाय को राज्य माता का दर्जा दें।नरेश पंडित ने कहा कि गाय माता सनातन धर्म का स्तंभ है।गाय माता को राज्य माता का दर्जा देने से राज्य में गौकशी और तस्करी पर भी लगाम लगेगी।आयुर्वेद में भी गाय के दूध और गौमूत्र से कई तरह की दवाइयां बनाई जाती हैं।नरेश पंडित ने कहा कि गाय सनातन धर्म की पहचान है।उन्होंने गाय को हिंदू धर्म का प्रतीक बताया।इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह भारत की आध्यात्मिक और आर्थिक संरचना के बीच की कड़ी है।गौवंश(गाय की वंशावली)और गौसंपदा (पशु की विविधता)भारत में सांसारिक और धार्मिक जगत को जोड़ती हैं।उन्होंने कहा हिंदू धर्म में गाय को मां के समतुल्य माना जाता है गाय के शरीर में हजारों देवी देवताओं का प्रवेश माना जाता है गौ माता के मल-मूत्र मैं भी शुद्धता पाई जाती है गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक व बहुमूल्य होता है विज्ञान ने भी गाय के महत्व को स्वीकार किया है।उन्होंने कहा हिंदू धर्म वैदिक संस्कृति में गौ माता के पूजन व समृद्धि का गुणगान देखने को मिलता है एक समय ऐसा भी था की हर घर में गाय को बड़े गौरव ब सम्मान से पाला जाता था गाय से ही मनुष्य के जीवन की सुबह होती थी दिनभर गौ माता की सेवा करने पर उसी के दूध से परिवार के बच्चों,बड़ों तथा वृद्धों का भरण पोषण होता था उसी के गोबर से खेती-बाड़ी को खाद मिलती थी तथा फसल सौ प्रतिशत जैविक तरीके से की जाती थी लेकिन धीरे-धीरे समय बदला पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में मानव को इतना अंधा बना दिया कि वह गौ माता जैसे बहुमूल्य व उपयोगी को भी बेसहारा छोड़ने पर मजबूर हो गया बाजार में उपलब्ध केमिकल से बने हुए दूध फलों व सब्जियों का भोगी बन गया इसका खामियाजा आज की जनरेशन को भुगतना पड़ रहा है आज की जनरेशन विभिन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित है है जिसके पीछे उनका खान पान केमिकल से युक्त खाद्य सामग्री का उपयोग माना जा सकता है।उन्होंने कहा हिन्दू समाज की भावना है और गायों को राष्ट्रीय दर्जा देकर इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।इसके साथ ही पूरे देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।














