कपूरथला()आज के डिजीटल और तेज रफ्तार वाले जमाने में ज्ञान शब्द का मतलब बदल रहा है।एक तरफ इंटरनैट पर मौजूद जानकारी को ही ज्ञान समझा जा रहा है,वहीं दूसरी तरफ धर्म के नाम पर अंधविश्वास लोगों की सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर रहा है।इस बारे में बात करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि डेटा और तथ्यों के संग्रह ही जानकारी है।माहिरों के मुताबिक,जब कोई इंसान बिना अनुभव या जांचे-परखे जानकारी आगे बढ़ाता है,तो वह ज्ञानी नहीं बल्कि सिर्फ इन्फॉर्मेशन कैरियर बनकर रह जाता है।सच्चा ज्ञान वह है जो इंसान के अंदर विनम्रता और समझदारी लाए।उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि आज लोग धार्मिक ग्रंथों के असली ज्ञान को छोड़कर अंधविश्वास की चपेट में आ रहे हैं।धर्म,जो इंसान को जगाने के लिए था,आज कई जगहों पर लोगों को गुमराह करने का जरिया बन रहा है।जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि तथाकथित बाबाओं और तांत्रिक चमत्कारों के नाम पर भोले-भाले लोगों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है।लोग मेहनत और ज्ञान के बजाय जादू-टोने में हल ढूंढ रहे हैं।जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि जानकारी की कमी और बेमतलब की परम्पराओं की वजह से लोग धर्म का असली मकसद (नैतिकता और सेवा)भूल गए हैं और सिर्फ रस्मों-रिवाजों को ही धर्म मान बैठे हैं।अंधविश्वास अक्सर डर से पैदा होता है। धर्म के नाम पर लोगों को नरक या किसी अनदेखी ताकत का डर दिखाकर ऐसे काम करने पर मजबूर किया जाता है जो बेमतलब हैं।जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि सोशल मीडिया के असर से वॉट्सऐप और फेसबुक पर फैलाई जा रही अधूरी और मनगढ़ंत धार्मिक कहानियां लोगों को असलियत से दूर कर रही हैं।उन्होंने कहा कि समझदारी की कमी की वजह से पढ़े-लिखे लोग भी कभी-कभी अंधविश्वास में फंस जाते हैं क्योंकि उनके पास ‘जानकारी’ तो होती है लेकिन ‘ समझ’ की कमी होती है। जब एक इंसान भेड़चाल में किसी तथाकथित चमत्कार के पीछे जाता है,तो दूसरे भी बिना सोचे-समझे उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं।जोगिंदर तलवाड़ ने कहा कि ज्ञान वह रोशनी है जो अंधविश्वास के अंधेरे को दूर करती है।अगर हमारा धर्म या हमारी जानकारी हमें ज्यादा विनम्र,समझदार और इंसानियत वाला नहीं बना रही है,तो हमें अपने अंदर झांकने की जरूरत है।असली धर्म ज्ञान पर आधारित है,अंधविश्वास पर नहीं।













