शिव सेना ने लोगो से 19 मार्च को हिंदू नव वर्ष धूमधाम से मनाने का किया आग्रह
कपूरथला( )शिव सेना ने जिले भर के धार्मिक,सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाए जाने वाले हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 के उपलक्ष्य में 19 मार्च को कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है।
बुधवार को जारी एक अपील में शिव सेना के सीनियर प्रदेश नेता ओमकार कालिया ने सनातन परंपरा में इस दिन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला,इसे हिंदू नव वर्ष की शुरुआत और नवीनीकरण औरआध्यात्मिक जागृति का प्रतीक अवसर बताया।कालिया के अनुसार,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र और शुभ दिनों में से एक है।इसी दिन से हमारे हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ होता है।यह तिथि मात्र कैलेंडर परिवर्तन नहीं है,बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता के नवीनीकरण का प्रतीक है।कालिया ने पुराणों और शास्त्रों में वर्णित संदर्भों का भी हवाला दिया,जिसमें कहा गया है कि ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी, जिस से इस अवसर को गहरा पौराणिक और ब्रह्मांडीय महत्व प्राप्त होता है।कालिया ने चुनौतीपूर्ण समय में आध्यात्मिक प्रथाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक आध्यात्मिक पद्धतियों ने ऐतिहासिक रूप से समाज को संकटों और अनिश्चितताओं से उबारने में मार्गदर्शन किया है।उन्होंने कहा जब भी दुनिया ने संकटों, अशांति और अनिश्चितता का सामना किया है,भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक प्रथाओं यज्ञ,हवन,जप,कीर्तन और सत्संग ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है।कालिया ने विरासती शहर के सभी संस्थानों से इस अवसर को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ मनाने का आह्वान किया है।इनमें मंदिरों में यज्ञ और हवन समारोह, धार्मिक केंद्रों में कीर्तन और सत्संग,प्रवचन और सामूहिक प्रार्थनाएं शामिल हैं।इसके अलावा कालिया ने लोगों को नए साल के प्रतीकात्मक स्वागत के रूप में घरों,मंदिरों और दुकानों को दीयों,झंडों और तोरणों से सजाने के लिए प्रोत्साहित किया।इस अपील में सामाजिक सद्भाव,समृद्धि और वैश्विक शांति के लिए प्रार्थना करने के महत्व पर भी जोर दिया गया।कालिया के अनुसार,संस्थानों और समुदायों द्वारा सामूहिक रूप से त्योहार मनाने से हिंदू समुदाय के भीतर एकता मजबूत होगी और साथ ही कल्याण और सद्भाव के व्यापक आदर्शों को बढ़ावा मिलेगा।हमारा मानना है कि यदि समाज की सभी संस्थाएं धर्म और संस्कृति के इस पवित्र त्योहार को एक साथ मनाएंगी,तो इससे न केवल हिंदू समुदाय के भीतर एकता और उत्साह मजबूत होगा , बल्कि पूरे विश्व के कल्याण की भावना को भी बल मिलेगा।












