कपूरथला()भारत व्रत,पर्व व त्योहारों का देश है।यूं तो हम हर दिन को पावन मानते हैं।महापुरुषों के निधन के दिनों पर भी हम शोक व्यक्त करने के स्थान पर उसे पुण्यतिथि के रूप में मनाते हुए कुछ नव-संकल्पों के साथ उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं।हम सदैव उत्कर्ष,प्रकाश, प्रगति,धर्म तथा विश्व-कल्याण मार्ग के अनुगामी हैं। नकारात्मकता का किसी भी भारतीय पर्व या त्योहारों में कोई स्थान है ही नहीं।हिन्दू नववर्ष भी तो एक नवसृजन का ही सन्देश लेकर आता है।कुछ नया होता है तभी तो उसे नया वर्ष कहते हैं।जब नया आता है तो उसका स्वागत भी तो धूमधाम से होना ही चाहिए।इस धूमधाम का वास्तविक अर्थ क्या!हिन्दू नववर्ष के स्वागत के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हर मन में सात्विक नव ऊर्जा का संचार हो। हमारे संस्कार व संस्कृति कहती है कि हम नवागंतुक का स्वागत दीप जलाकर,थाली सजाकर,आरती उतार कर करें। कुमकुम,तिलक या टीका लगाकर,स्वच्छ वस्त्र पहनकर, पुष्प,धूप,दीप,नैवेद्य आदि से घर को सुगंधित कर शंख व मंगल ध्वनि के साथ हवन-यज्ञ,सत्संग आराधना द्वारा प्रभु का गुणगान करें।यह बात विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के अध्क्ष्य नरेश पंडित,जिलाध्क्षय जीवन प्रकाश वालिया व बजरंग दल के जिलाध्क्षय आनंद यादव ने संयुक्त रूप से समूह शहर निवासिओं को हिन्दू नववर्ष का स्वागत घरो और अपने कार्यालो में दिप प्रजलित कर करने की अपील करते हुए कही।उन्होंने कहा हिन्दू नववर्ष पर प्रभात-फेरियां निकालें,संतों व वरिष्ठ जनों की सेवा कर,संतों,विद्वानों, कन्याओं,निराश्रितों तथा गौमाता को भोजन कराकर पुण्य लाभ कमाएं।भगवान के मन्दिर जाएं,गरीबों और रोगियों की सहायता,वृक्षारोपण,समाज में प्यार और विश्वास बढ़ाने के प्रयास तथा शिक्षा का प्रसार जैसे कार्यों का संकल्प लें।नरेश पंडित ने कहा कि हिंदू नववर्ष भारतीय संस्कृति,परंपरा और गौरव का प्रतीक है।उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर घर से हिंदू युवक बजरंग दल से जुड़कर समाज को मजबूत करें।उन्होंने बताया कि अखाड़ों की शुरुआत की जा चुकी है और हर हिंदू को अपने नजदीकी मंदिरों में जाना चाहिए।नरेश पंडित ने संगठन के हिंदू नववर्ष के अवसर पर समाज को एकजुट करने और संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया।नरेश पंडित ने हिन्दुओं से संगठित रहने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को अपने आसपास के मंदिरों में भजन-कीर्तन कर सामाजिक एकता को मजबूत करें।












