किसानी क्षेत्र के लिए कम बजट और कृषि नीति में देरी पर राणा गुरजीत सिंह की चिंता

 

ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज :

चंडीगढ़, 10 मार्च 2026:

पंजाब विधानसभा में राज्य के बजट पर चल रही चर्चा के दौरान कपूरथला से कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने आज वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए निर्धारित मात्र 15,377 करोड़ के बजट प्रावधान पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि भले ही बजट में फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) का उल्लेख किया गया है, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई देता है और इससे पंजाब की फसल प्रणाली में वास्तविक बदलाव लाने के लिए आवश्यक गंभीरता नजर नहीं आती। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उस समय वादा की गई कृषि नीति अभी तक जारी नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि पंजाब मुख्य रूप से कृषि पर आधारित राज्य है और किसानों को स्पष्ट दिशा देने के लिए एक मजबूत और व्यापक कृषि नीति की तत्काल आवश्यकता है।कृषि क्षेत्र ही पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि खेती संकट का सामना कर रही है,” उन्होंने सदन में कहा।

राणा गुरजीत सिंह ने भूजल संरक्षण को समय की बड़ी आवश्यकता बताते हुए सरकार से अपील की कि फसल विविधीकरण को तुरंत और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने किसानों को पारंपरिक धान और गेहूं की खेती से हटकर अन्य फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए मक्का की बड़े पैमाने पर खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पंजाब में उगाई जाने वाली मक्का की किस्में उत्तरी अमेरिकी देशों से भी बेहतर हैं, जहां अधिकतर जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) मक्का की खेती की जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में गेहूं और चावल के भंडारण के लिए जगह की भारी कमी है, क्योंकि पिछले सीजन का बड़ा अनाज भंडार पहले से ही गोदामों में पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “भंडारण संकट का स्थायी समाधान फसल विविधीकरण में ही है।उन्होंने चेतावनी दी कि 1 अप्रैल से जब रबी की गेहूं मंडियों में आनी शुरू होगी, तब यह समस्या और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया, “इतना बड़ा अनाज भंडार राज्य सरकार कहां रखेगी?”

अपने अनुभव का हवाला देते हुए राणा गुरजीत सिंह ने सरकार से अपील की कि उनकी सलाहों पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि वह किसानों को शुगर बीट और मक्का जैसी नकदी फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं और अब कसावा की खेती पर भी काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब की खेती को लंबे समय तक मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

राणा गुरजीत सिंह ने सिंचाई के लिए नहरी पानी के उपयोग में हुए बढ़ोतरी का स्वागत करते हुए कहा कि यदि यह दर 67 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, तो इसे 100 प्रतिशत तक क्यों नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मक्का की खेती नहरी पानी के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकती है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी को फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने वाली और पर्यावरण संरक्षण में सहायक नई फसल किस्मों के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

 

 

 

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