भारतीय भाषाओं के लिए बहुभाषी सुगम्यता उपकरण लॉन्च, दिव्यांगजनों को मिलेगा सशक्तिकरण

पटियाला: पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के रिसर्च सेंटर फॉर टेक्निकल डेवलपमेंट ऑफ पंजाबी लैंग्वेज, लिट्रेचर एंड कल्चर द्वारा आयोजित दृष्टिबाधित व्यक्तियों हेतु भाषिणी प्रौद्योगिकियों पर संगोष्ठी आज सेन्ट्रल हॉल में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में पूरे भारत के दृष्टिबाधित उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर समाधानों का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस आयोजन में भारत सरकार की भाषिणी पहल के अंतर्गत विकसित अत्याधुनिक एआई-आधारित सुगम्यता उपकरणों का प्रदर्शन किया गया, जिसका लक्ष्य प्रमुख भारतीय भाषाओं के लिए उन्नत तकनीक विकसित करना है।

 

डीीन अकादमिक्स डॉ. जसविंदर सिंह ब्राड़ ने तीन प्रमुख सॉफ्टवेयरों का शुभारंभ किया। पहला सॉफ्टवेयर दृष्टि-लाइब्रेरी, जिसे आईआईआईटी हैदराबाद ने विकसित किया है, एक एआई-आधारित मंच है जो भाषिणी के OCR और TTS सिस्टम का उपयोग करके मुद्रित पुस्तकों को बारह भारतीय भाषाओं—जिनमें पंजाबी भी शामिल है—में स्वाभाविक ध्वनि वाले ऑडियोबुक में परिवर्तित करता है। नवनिर्मित चेतना (Navchetna) के सहयोग से स्नातक स्तर की पाठ्यपुस्तकों को ऑडियो प्रारूप में बदलने का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।

 

दूसरा सॉफ्टवेयर दृष्टि-डॉट भारत का पहला ऐसा सिस्टम है जो बारह भारतीय भाषाओं में मुद्रित पुस्तकों को सीधे ग्रेड-1 ब्रेल में बदलने में सक्षम है—यह ब्रेल सुगम्यता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

तीसरा सॉफ्टवेयर द्विभाषी गुरमुखी OCR मोबाइल ऐप है, जिसे पंजाबी विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। यह मोबाइल उपकरणों का उपयोग करते हुए छवियों से पंजाबी पाठ की वास्तविक समय में पहचान और पढ़ने की सुविधा प्रदान करता है।

 

कार्यक्रम में दृष्टि-सभा के प्रोटोटाइप का भी प्रदर्शन किया गया—यह पंजाब विधानसभा की बहुभाषी बहसों के लिए भारत का पहला वॉइस-इनेबल्ड प्रश्न-उत्तर प्रणाली है।

 

संगोष्ठी में IIT मद्रास, IIIT हैदराबाद, CDAC मुंबई और Zandola के शोधकर्ताओं द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिन्होंने भारत में एआई आधारित सुगम्यता तकनीकों के तेजी से विकसित होते पारिस्थितिकी-तंत्र को उजागर किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने केंद्र में चल रही भाषिणी से संबंधित शोध गतिविधियों की जानकारी साझा की। अपने मुख्य वक्तव्य में IIIT हैदराबाद के प्रो. सी. वी. जवाहर ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगति, विशेष रूप से भारतीय भाषाओं के पाठ पहचान प्रणाली, पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में NIEPVD देहरादून के राजेंद्र नेगी द्वारा सहायक तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यान और डॉ. जसविंदर सिंह ब्राड़ (डीन अकादमिक्स) का अध्यक्षीय संबोधन भी शामिल था।

 

 

 

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