नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी, गांधी परिवार और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने बिना सीधा नाम लिए राहुल गांधी की तुलना एक ‘नाकाम प्रोडक्ट’ से करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने नेता को रीलॉन्च करने की लगातार कोशिशों में देश के हितों और वैश्विक स्तर पर भारत की साख को दांव पर लगा रही है। ‘श्रीहरिकोटा से जितने रॉकेट लॉन्च नहीं होते, उससे ज्यादा बार नेता की रीलॉन्चिंग’प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा-कांग्रेस अपने एक “नाकाम प्रोडक्ट” को बार-बार पेश करने में जुटी है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि सालभर में श्रीहरिकोटा स्थित देश के अंतरिक्ष केंद्र से जितने रॉकेट लॉन्च नहीं किए जाते, उससे कहीं अधिक बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने का असफल प्रयास करती है। विनाश की स्वतंत्रता : उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कांग्रेस को अपना राजनीतिक विनाश करना है, तो वह इसके लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन एक परिवार की नाकामियों को छिपाने के लिए देश की उपलब्धियों, प्रगति और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाना अस्वीकार्य है।
‘विदेश जाकर देश को बदनाम करने और दखल की अपील का आरोप’
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब पूरी दुनिया एक नई वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, तब देश के भीतर कुछ ताकतें भारत में अव्यवस्था फैलाने का सपना देख रही हैं:
छवि बिगाड़ने की साजिश : पीएम ने कहा कि कुछ लोग लगातार भारत की छवि खराब करने पर तुले हैं। वे विदेशों में जाकर देश को बदनाम करते हैं और विदेशी शक्तियों से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की अपील तक करते हैं।
संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना : परिवार के राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की बेताब कोशिश में संवैधानिक संस्थाओं और भारत की प्रगति पर अविश्वास जताया जा रहा है।
‘पार्टी पर बोझ बना परिवार, ईमानदार आलोचकों की आवाज दबा रहा हंगामा‘
गांधी परिवार के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा- यह परिवार अब खुद अपनी ही पार्टी पर भारी बोझ बन चुका है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी इस कड़वी हकीकत को भली-भांति समझते हैं और निजी मुलाकातों में इसका जिक्र भी करते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर वे अपमान का कड़वा घूंट पीकर खामोश रहने को मजबूर हैं।
ईमानदार आलोचकों को नुकसान : कांग्रेस के इस आक्रामक और हंगामेदार रवैये से लोकतंत्र को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र की सच्ची भलाई चाहते हैं और सरकार के कट्टर विरोधी होते हुए भी सार्थक रचनात्मक आलोचना करना चाहते हैं, उनकी आवाज कांग्रेस के अनर्गल शोर-शराबे और संसद में हंगामे के बीच दबकर रह जाती है।







